“कुलाचार” के प्रति दृढ़धर्मी बनो उसमें कोई समझौता नहीं होंना चाहियेः- मुनि श्री प्रमाण सागर
सिलवानी (रायसेन)
“रस्ता निगवे से कटत है,बातन से नहीं” यह बात एक राहगीर भी समझता है उसी प्रकार धर्म के मार्ग पर चलना शुरू करोगे तो धर्म अंदर प्रवेश करेगा” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने लघु पंचकल्याणक के अवसर पर भगवान के दीक्षा एवं कैवल्यज्ञान कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किये,उन्होंने कहा कि कोरी धर्म की चर्चा करो और वह चर्या में न आये तो कोई लाभ मिलने वाला नहीं,चार बातें चर्चा,चेष्टा,
चिंता,और चिंतन की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि चर्चा में समाधान का रास्ता दिखा सकता है,उस रास्ते पर चलने की चेष्टा करोगे तभी आप मंजिल तक पहुंच सकते हो, मुनि श्री ने कहा कि धर्म का कार्य करने के लिये मन बनाना पढ़ता है,जब कि पाप की चेष्टा तो पल पल में उत्पन्न होती रहती है, संत कहते है कि पाप की रुचि को पुण्य की रुची में परिवर्तन करोगे तभी तुम धर्म की चेष्टा कर पाओगे।
मुनि श्री ने कहा कि संतों के आगमन से आपकी धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है और पुण्य इकट्ठा होता है क्या यह पुण्य दिखता है?
मुनि श्री ने कहा कि आपके अंदर सदविचारों की उपलब्धि हो रही है,दया करूणा और दान देने के भाव में वृद्धि हो रही है तो समझना पुण्य में वृद्धि हो रही है और इसके उलट यदि आपकी रूचि पाप कार्यों की ओर है कलुषता बढ़ रही है तो समझ लेना कि दिखावे के लिये ऊपर ऊपर का कोरा धर्म कर रहे हो ऐसा व्यक्ति कभी धर्म का लाभ नहीं ले सकता।
मुनि श्री ने कहा कि आप लोग अपनी दुकान तथा फर्म की रैपूटेशन का ध्यान रखते हुये कोई भी ऐसा कार्य नहीं करते जिससे फर्म की छवि खराब हो लेकिन जैनी होकर यदि आप अपने कुलाचार का पालन नहीं करोगे तो क्या आप भगवान महावीर की रैपूटेशन को खराब नहीं कर रहे? जबाब दीजिये? उन्होंने कहा कि आप उपवास एकासन आदि नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं कम से कम अपने कुलाचार का पालन तो करो अपने जैनी होंने को क्यों शर्मिंदा कर रहे हो? उन्होंने कहा कि जो भगवान महावीर का अनुयायी है उसे रात्री भोजन का त्याग तो करना ही चाहिये, मुनि श्री ने कहा कि इस सभा में भी कयी ऐसे लोग है जो 70-75 वर्ष के हो गये है फिर भी आसक्ति नहीं मिटती उनका अभी तक रात्रि भोजन का ही त्याग नहीं है, फलाहार के नाम पर फुल आहार कर रहे हो?
मुनि श्री ने कहा कि विचार कीजिये जो कार्य हमारे कुलाचार के विरुद्ध है,वह कार्य यदि आप करोगे तो कौन तुम्हारी ग्यारंटी लेगा? मुनि श्री ने कहा कि त्रिलोकी नाथ को आज वही व्यक्ती आहार दान दे जो रात्री भोजन का पूर्णतया त्यागी हो उन्होंने रात्री भोजन त्याग की महिमा बताते हुये कहा कि चारो प्रकार के आहार का त्याग करने वाले को एक पखवाड़े के उपवास का फल मिलता है।प्रवचन के उपरांत मुनि वृषभसागर आहार चर्या संपन्न हुई।
प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्र. अशोक भैया सिर पर भगवान को लेकर निकले एवं राजा श्रैयांस और राजा सोम ने उनका पड़गाहन किया तथा इच्छुरस से पास कराई।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया दोपहर पश्चात भगवान को कैवल्यज्ञान की क्रियायें की गई एवं समवसरण में भगवान विराजमान हुये मुनि श्री के माध्यम से दिव्यध्वनि खिरी जिसमें श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। मंगलवार 16 दिसंबर को मोक्षकल्याणक के साथ यह लघु पंचकल्याणक का समापन होगा।एवं रथयात्रा निकाली जाएगी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







