आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने विद्यार्थियों को दिया संस्कार, संयम और सफलता का मंत्र
परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए जीवन में संस्कार, अनुशासन, संयम और सकारात्मक सोच का महत्व बताया। उन्होंने कबीरदास जी के प्रसिद्ध दोहे “जब हम आए जगत में, जग हँसे हम रोए, ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोए” का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए कि उसके जाने के बाद लोग उसे सम्मान और प्रेम से याद करें।
आचार्य श्री ने कहा कि बड़े सपने देखने मात्र से व्यक्ति महान नहीं बनता, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष और दृढ़ संकल्प आवश्यक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ-साथ संस्कार भी अर्जित करें तथा माता-पिता और गुरुजनों के सपनों को साकार करने का प्रयास करें।

उन्होंने नशामुक्त जीवन का संदेश देते हुए कहा कि गुटखा, तंबाकू, शराब एवं अन्य व्यसन व्यक्ति और परिवार दोनों को बर्बाद कर देते हैं। विद्यार्थियों को बचपन से ही इन दुर्व्यसनों से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए।

आचार्य श्री ने साधु जीवन की कठिन तपस्या का उदाहरण देते हुए बताया कि आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण के लिए त्याग और संयम आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना रखने की प्रेरणा दी।

अपने उद्बोधन में उन्होंने सफलता का सूत्र बताते हुए कहा – “ऊँची सोच, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा” जीवन में सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने समझाया कि समस्याओं से घबराने के बजाय उनके समाधान पर ध्यान देना चाहिए। जीवन की कठिनाइयों के बीच धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण ही आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

आचार्य श्री ने विद्यार्थियों को आत्महत्या जैसे विचारों से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य है। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर माता-पिता, गुरुजनों एवं मित्रों से संवाद कर समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने मोबाइल के सीमित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का सदुपयोग करना चाहिए, किंतु उसकी लत से बचना आवश्यक है। साथ ही ब्रह्ममुहूर्त में अध्ययन करने, समय पर सोने-जागने तथा स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी।

शिक्षकों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकों से ही नहीं, बल्कि अपने आचरण और व्यवहार से भी विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं। इसलिए उनका जीवन आदर्श और प्रेरणादायक होना चाहिए।
अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, नैतिक उन्नति एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान की मंगलकामना करते हुए अहिंसा, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
