तीन संस्थाओं ने दिया संयुक्त ज्ञापन -शेरगढ़ अभ्यारण्य के साथ पुरातत्व का भी हो संरक्षण
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कोटा, 8 जून 2026 ।
हाड़ौती के वन क्षेत्र को संरक्षित करने के क्रम में उपवन संरक्षक विभाग द्वारा शेरगढ वन क्षेत्र को भी अभ्यारण्य क्षेत्र घोषित किया हुआ है, तथा उसी दिशा में सतत योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है । इसी वन क्षेत्र में अति पुरातात्विक महत्व के शिलालेख एवं तीर्थंकर प्रतिमाएं भी हजारों वर्षों से विद्यमान है ।
जैन अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी की भगवान आदिनाथ प्रतिमा का उदगम भी इसी वनक्षेत्र से वर्णित है । उस स्थान एवं वहां उपलब्ध पुरातत्व का संरक्षण हो सके एवं आने वाले पर्यटक वन क्षेत्र के साथ इस उपलब्ध पुरातत्व के इतिहास को भी जान सके इस आशय के साथ सोमवार को पुरातत्व संरक्षण के प्रति सजग अंतर्राष्ट्रीय संगठन इंटेक की कोटा इकाई, तीर्थ संरक्षण के प्रति कार्यरत श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, कोटा के संयुक्त प्रतिनिधि मंडल ने उपवन संरक्षक अनुराग कुमार भटनागर को अपना ज्ञापन भेंट किया ।

इंटेक कोटा कन्वीनर निखिलेश सेठी, एकता धारीवाल, पी.सी जैन, आर.के जैन, पीयूष मवासा, महासभा हाड़ौती संभाग महामंत्री राकेश जैन ‘चपलमन’, पुरातत्व समन्वयक जे.के. जैन, सकल दिगम्बर जैन समाज समिति कोटा के अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष अनिल ठोरा सहित सभी प्रतिनिधियों ने अपना विषय रखते हुए उपवन अधिकार से शिष्टाचार भेंट भी की तथा बताया गया कि उक्त क्षेत्र में हजारों वर्षों से शिला पर प्रतिमा उत्कीर्ण है तथा पूरे क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व जैन आबादी के साथ जैन मंदिरों का वैभव पूर्ण समूह रहा होगा ।

कालांतर में हुई विनाशकारी गतिविधियों से उस वैभव को नुकसान पहुंचा होगा जिसका गवाह आज भी वहां उपस्थित पुरातात्विक अवशेष है । जिनका संरक्षण किया जाना आवश्यक है ।
उपवन संरक्षक द्वारा पूरी बात को समझते हुए संस्था प्रतिनिधियों को आश्वत किया गया कि अभ्यारण्य क्षेत्र को संरक्षित करने के साथ विभाग वहां मौजूद पुरातत्व का भी संरक्षण करने के प्रति कटिबद्ध है। 
सभी संस्थाओं के विज्ञजन भी स्थान का अवलोकन कर उसके संरक्षण हेतु अपने सुझाव विभाग को प्रदान करे ताकि नियम प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए संरक्षण किया जा सके ।
राकेश जैन ‘चपलमन’ 9829097464 से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
