मां न होती तो कोई नहीं होता: पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज 

धर्म

मां न होती तो कोई नहीं होता: पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज 

 भिंड

शहर के निराला रंग बिहार परिसर में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने शहर में कलश घटयात्रा धूमधाम से निकाली। यात्रा में बड़ी संख्या में संतों के साथ श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान जय जिनेंद्र और श्रीजी के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। गौरतलब है कि घटयात्रा शहर के कुआं वाले जैन मंदिर से प्रारंभ हुई, जो परेड चौराहा, सदर बाजार, राज टॉकीज मार्ग होते हुए बैंड बाजों के साथ शहर के निराला रंग बिहार परिसर में पहुंची। यात्रा में महिलाएं हाथों में कलश लेकर वहीं हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे। कार्यक्रम स्थल पर मंडप शुद्धि के बाद दिनेश कुमार जैन ने धर्म ध्वजा फहराते हुए महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्रोच्चारण प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन और आशीष जैन द्वारा किया गया।

 

 

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पहले दिन धर्मसभा में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि मां न होती तो तीर्थंकर ऋषभदेव, भगवान राम और हम सब भी नहीं होते। मां वह जननी है जिन्होंने कई तीर्थंकर और महापुरुषों को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि आज हम सबको अपनी-अपनी मां का उपकार मानना चाहिए।Advertisement for Sudha Amrut mustard oil showing yellow background, mustard seeds, oil bottles and price/pack sizes; highlights 100% mustard oil and FSSAI mark.

 

 

 

जीवन तनावग्रस्त होता जा रहा है, पंचकल्याणक से आत्मिक शांति

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भौतिकता और प्रतिस्पर्धा के बीच मानव जीवन तनावग्रस्त होता जा रहा है। ऐसे में पंचकल्याणक जैसे आयोजन आत्मिक शांति प्रदान करते हैं और मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप की पहचान कराते हैं। उन्होंने समाज के लोगों से धर्म, संस्कार और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि तीर्थंकरों के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पूर्व थे। पंचकल्याणक महोत्सव इन्हीं आदशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।

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बेटा-बेटी में भेद करना बहुत गलत

 

महाराज ने कहा कि आजकल सुनने को मिलता है कि लोग बेटा-बेटी में भेद कर रहे है, जो ही सही नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि हमें जन्म और मरण का उपकार मानना चाहिए। बच्चों को मोबाइल का उपयोग कम करना चाहिए, क्योंकि इसमें समय बर्बाद हो रहा है। बचपन में बुद्धि का विकास होता है, इस सदमार्ग में लगाएं।

 

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आत्मशुद्धि, संस्कार और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है पंचकल्याणक

महाराज श्री ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संस्कारों के संवर्धन और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। पंचकल्याणक के माध्यम से तीर्थंकरों के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक की स्मृति को जीवंत किया जाता है। इससे समाज को सदाचार, अहिंसा, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। पंचकल्याणक महोत्सव में होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, अभिषेक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां केवल प्रतीकात्मक आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे गहन आध्यात्मिक संदेश निहित है। इन आयोजनों के माध्यम से समाज में नैतिकता, सदाचार, अहिंसा, सत्य और संयम जैसे मूल्यों का प्रसार होता है।

 

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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