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भौतिकता की अंधी दौड़ छोड़ आत्मिक शांति के लिए संयम अपनाएं युवाः मुनिश्री प्रणम्यसागरजी

धर्म

भौतिकता की अंधी दौड़ छोड़ आत्मिक शांति के लिए संयम अपनाएं युवाः मुनिश्री प्रणम्यसागरजी

बही पार्श्वनाथ तीर्थ

अर्हम योग प्रणेता मुनिश्री 108प्रणम्यसागर महाराज का गुरुवार को नगर में मंगल प्रवेश हुआ। वे मनासा से विहार करते हुए श्री बही पार्श्वनाथ तीर्थ पहुंचे।  

वास्तविक सुख-शांति के लिए संयम, ध्यान और धर्म को जीवन में अपनाना जरूरी’आगमन के बाद आयोजित धर्मसभा में मुनि प्रणम्यसागर महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में आत्मिक शांति से दूर होता जा रहा है। वास्तविक सुख और शांति के लिए संयम, ध्यान और धर्म को जीवन में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तीर्थ वंदना, स्वाध्याय और आत्मचिंतन से जीवन को नई दिशा मिलती है तथा आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। मुनिश्री ने धर्ममय जीवनशैली अपनाने और आध्यात्मिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया।

युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान

मुनिश्री ने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग कर सदाचार एवं धर्ममय जीवन अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात कर जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कहा कि नैतिकता और संस्कार ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करते हैं। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुवर की अमृतवाणी सुनकर उनके संदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

 इन्हें मिला आहार का सौभाग्य 

मुनिश्री को पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य श्री ब्रह्मचारिणी रीता दीदी-ब्रह्मचारिणी अर्पणा दीदी श्री पारसमल -कान्ता जैन बहिपार्श्व नाथ वालों को एवं पियुष-अर्चना-विदेह इन्दौर, प्रशान्त – मीना – इशिता चांदखेड़ी,शशि इन्दौर,विमला – लीला चांदखेड़ी को प्राप्त हुआ।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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