श्री चिन्मय सागर जी महाराज जंगल वाले बाबा जी का समाधि मंदिर,गुरु मंदिर की भव्य प्रतिष्ठा संपन्न
जुगुल कर्नाटक
परम पूज्य ,परम तपस्वी , विश्व के महान संत, मुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी महाराज जंगल वाले बाबा का गुरु मंदिर की भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव 8 एवं 9 मई को जुगल कर्नाटक में सानंद संपन्न हुई।
जुगुल ग्राम में श्री चिन्मय सागर जी महाराज, जंगल वाले बाबा का जन्म हुआ एवं उनकी अंत समय में समाधि 18 अक्टूबर 2019 को जुगल ग्राम में ही संपन्न हुई। जंगल वाले बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अभिषेक मोदी ने बतलाया की लगभग 4 वर्ष पूर्व अग्नि संस्कार स्थल एवं मुख्य मार्ग पर भूमि खरीद कर कार्य प्रारंभ किया गया, एक स्थान पर चिन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंदिर विशाल प्रतिमा, आचार्य शांति सागर जी महाराज के चरण, आचार्य विद्यासागर जी महाराज के चरण की स्थापना की गई है। यह समस्त कार्यक्रम आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज, के मंगल सानिध्य में विधि विधान पूर्वक संपन्न हुआ । इस कार्यक्रम के प्रतिष्ठाचार्य श्री भरत जी शास्त्री इंदौर एवं संदेश पंडित जी नेज में संपन्न कराया। कार्यक्रम में महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि चिन्मय सागर जी महाराज विश्व के एकमात्र संत थे ,जिन्होंने इस पंचम काल में चतुर्थ काल की साधना जंगलों में कैसे की जाती है, इसका साक्षात दर्शन कराया है ।हमारे तीर्थंकर भगवंत ने जंगल में साधना कर मोक्ष गति को प्राप्त किया है और सिद्ध शिला में विराजमान हुए । इस प्रकार कठोर साधना करने वाले अगर कोई साधक रहे हैं तो वह चिन्मय सागर जी महाराज जंगल वाले बाबा रहे । हमें गुरुवार के सानिध्य में अनेक बार उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, उनकी साधना देखने का अवसर मिला ,हम धन्य हो गए, जिन्हें हम गृहस्थ अवस्था में दर्शन करने जाते थे, आज उनका प्रतिमा का प्रतिष्ठा का कार्य हमारे हाथों संपन्न हो रहा है। निश्चित ही ऐसे साधु संतों के कारण ही आज देश धर्म समाज प्रगति कर रहा है। यह जो मंदिर निर्मित हुआ है इस मंदिर में जो भी अपनी मनोकामना लेकर आएगा और श्रद्धा भक्ति भाव से गुरुवर के समक्ष अपने भावों को रखेगा निश्चित थी उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। मुनि श्री ने इस गुरु मंदिर का नाम *चिन्मय तीर्थ धाम रखा* *ग्राम गुरु* रखा जो भी गांव में शुभ कार्य होते हैं, वह यहां से गुरुदेव से आशीर्वाद लेकर प्रारंभ करेंगे उनके सभी काम शुभ होंगे उन कार्यों में बाधा नहीं आएगी ,ऐसा महाराज श्री ने सभी को प्रवचन में व्यक्त किए।

श्री भरत की शास्त्री इंदौर ने बताया की 8 तारीख को याग मंडल विधान का माढ़ना कर 256 अर्ध समर्पित किया गया, 9 तारीख को प्रातः काल मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज के द्वारा प्रतिमा को दीक्षा प्रदान की गई एवं सूर्य मंत्र दिया गया। गुरु के सानिध्य में आचार्य शांति सागर जी, आचार्य विद्यासागर जी के चरणों को भी मंत्रित करके प्रतिष्ठित किया गया। शाम के रथ यात्रा निकाली गई जो जुगल के प्रमुख मार्गो से गुजरते हुए रात्रि 11:00 बजे संपन्न हुई। जिसमें , भूमि प्रदाता मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रकाश सुमन लता मोदी आलोक रजनी मोदी और उनके परिवार विनोद मोदी सहित रथ में बैठे समाज के द्वारा उनका सम्मान किया गया।
मंदिर छतरी निर्माण में सहयोगी रहे श्री जमुनालाल जी हापावत मुंबई ,श्री विनोद जी कोटा, श्री अनिल जी शाहपुरा भी रथ पर विराजमान रहे। मुख्य पंडाल पर ध्वजारोहण करने का सौभाग्य श्री जमुनालाल लक्ष्मी देवी जी हपावत मुंबई को प्राप्त हुआ, गुरु मंदिर के समक्ष ध्वजारोहण करने का सौभाग्य श्री प्रदीप जैन विश्व परिवार रायपुर ,श्री नरेंद्र जी गुरु कृपा रायपुर, श्री पवित्र जैन बडजात्या किशनगढ़, आलोक रजनी, सुमन लता मोदी को प्राप्त हुआ।

मंदिर निर्माण में जिन-जिन का सहयोग प्राप्त हुआ उन सभी का सम्मान मंच के माध्यम से किया गया ।समस्त श्रावकों के एवं समस्त ग्राम वासियों के सभी समाज की भोजन व्यवस्था श्री जंगल वाले बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से की गई थी।

मंदिर के सभी कार्यक्रम एवं मंदिर की आगे की व्यवस्था श्री चिन्मय सागर चैरिटेबल ट्रस्ट भाटापारा जुगल के माध्यम से संपन्न की जाएगी प्रकाश मोदी जी ने बतलाया की हर वर्ष विशेष दिन पर महाराज श्री के जन्मदिन, समाधि दिवस एवं मंदिर प्रतिष्ठा दिवस ,पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वार्षिक मेला भी संपन्न किया जाएगा।
Abhishek Modi bhatapara
