बच्चों के भगवान तो उनके माता-पिता ही है – उपाध्याय विकसंत सागर महाराज  ग्रीष्मकालीन प्रवास में प्रवचन माला का शुभारंभ 

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बच्चों के भगवान तो उनके माता-पिता ही है – उपाध्याय विकसंत सागर महाराज  ग्रीष्मकालीन प्रवास में प्रवचन माला का शुभारंभ

निवाई –

श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर में चल रहे ग्रीष्मकालीन प्रवास पर पूज्य गुरुदेव उपाध्याय विकसंत सागर महाराज संध के सानिध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज के द्वारा प्रवचन माला का बुधवार को दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ किया गया जिसमें दीप प्रज्वलन एवं भगवान का चित्र अनावरण करने का सौभाग्य नीरज जैन माधोराजपुरा, नन्द लाल चौधरी, विमल पाटनी, एवं मोहनलाल चंवरिया को मिला। प्रवचन माला का मंगलाचरण चेतन जैन ने किया।

 

जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा एवं विमल जौंला ने बताया कि उपाध्याय विकसंत सागर महाराज की दैनिक चर्या सुबह स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, प्रवचन माला, आहार चर्या, दोपहर में स्वाध्याय, सामायिक, सांयकाल आनन्द यात्रा, गुरु भक्ति, शंका समाधान, एवं आरती का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर उपाध्याय विकसंत सागर महाराज ने कहा कि लक्ष्य हासिल करना है तो सही उपाय करना होगा, सही मार्ग तभी तय होगा जब हमारा उद्देश्य सही दिशा में कार्य करेगा। उपाध्याय विकसंत सागर महाराज बुधवार को प्रवचन माला में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मन को वश में कर लिया तो हमारा कल्याण हो जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि मन को वश में कर लेने से हमारे सारे कार्यों की सिद्धि हो जाएगी। साधना के लिए साधुओं को उसी संध में जाना चाहिए जिस संध में पांच पद रहते हों। उन्होंने कहा कि सूतक के बाद जब तक आपका शुद्धि करण नहीं हो जाता तब तक आप दान भी नहीं दे सकते। माता पिता अपने बच्चों को धार्मिक संस्कार देकर जीवन को धन्य करते हैं। गुरु के वचन ही श्रेष्ठ है।Political campaign poster featuring a smiling man in a blue striped shirt and black vest on the left, with bold Hindi text on the right and a red flower motif.Advertisement poster for Surya Amrit mustard oil with a yellow backdrop, bottle lineup, mustard seeds, and yellow flowers, conveying a natural-tresh taste message.

 

उन्होंने कहा कि संसार की स्थिति का अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि यहां पर जन्मा हर मानव स्वार्थी हैं। जिन्होंने माता पिता की सेवा नहीं की इंसान होकर भी इंसान की भावनाओं को नहीं समझा, भगवान भी उनकी पुकार सुनने वाले नहीं हैं। सच पूछा जाए तो बच्चों के भगवान तो उनके माता-पिता ही है।

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और जो उनकी सेवा नहीं करते हैं उन्हें असहाय अवस्था में बिलखता हुआ छोड़ देते हैं वह भगवान की भक्ति करने के अधिकारी नहीं है। उन्होंने माता पिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बालक की प्रथम गुरु उसकी मां है और परिवार प्रथम पाठशाला है। स्वार्थी तो बनें परन्तु नीति न्याय को न भूलें। मर्यादा का उल्लघंन न करें तथा अपने माता-पिता के कर्तव्यों का प्रतिक्षण स्मरण करें।

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