पूज्य स्वस्तिभूषण माताजी का जीवन दृढ़ संकल्प से जुड़ा है विनोद भैया खोटी आदत को व्यसन कहते है स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी अतिशय क्षेत्र पर विराजमान है और यहां महती ती धर्म प्रभावना हो रही है।
शुक्रवार की बेला में पूज्य माताजी ने अनर्थ दंडवत के विषय में समझाया एवं कहा कि खोटी आदत को व्यसन कहते हैं।
पूज्य माताजी ने विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि “प्रयोजन रहित सोचना प्रयोजन रहित कार्य करना ही अनर्थदंड है!” उन्होंने आईपीएल मैच का उदाहरण देते हुए समझाया कि क्रिकेट मैच मैदान में चल रहा है और हम टीवी पर उनकी हार जीत को देखकर खुशी और दुःख मना रहे हैं! इसको कहतें हैं व्यर्थ में पाप कमाना!

पूज्य माताजी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अभी आई पी एल मैच चल रहे हैं रोज उसमें 3 घंटे मैच देखने में लगाते हो उससे क्या लाभ हुआ! व्यर्थ के पाप बंध कर रहें हैं! अगर इतने दिनों से रोज ढाई-तीन घंटा दुकान चलाने में मन लगाया होता तो घर के लिए थोड़े पैसे अधिक जुड़ जाते! पढ़ाई में ढाई-तीन घंटा लगाया होता तो आज अच्छा परिणाम आया होता! अगर ढाई-तीन घंटा स्वाध्याय किया होता तो आज हमारा ज्ञान कितना बढ़ गया होता! धीर धीरे यह मैच आदि की आदत लग जाती है! खोटी आदत को व्यसन कहते हैं! जिस कार्य से कोई लाभ कोई प्रयोजन ना हो उसे कहते हैं अनर्थदंड





उन्होंने ध्यान के विषय में भी प्रकाश डाला और कहा कि मन वचन काय की एकाग्रता को ध्यान कहते हैं! जिस चीज को ध्यान से करोगे उसके अनुसार कर्म बंध होगा!वोट देना अच्छी सरकार का चुनाव करना हमारा कर्तव्य है हमें वोट डालना चाहिए! लेकिन दिन भर उसी का चिंतन करते रहना ये जीतेगा वो हारेगा ये अनर्थदंड है!

पूज्य माता जी के प्रवचन से पूर्व विनोद भैया ने माता जी के विषय में प्रकाश डाला और बताया कि जैसे वृक्ष का अस्तित्व जड़ से होता है!

वृक्ष जब बड़ा हो जाता है तो उसकी सामर्थ बढ़ जाती है ! कितनी आंधी तूफान आए खड़ा रहता है! वैसे ही पूज्य माता का जीवन एक दृढ़ संकल्प से जुड़ा है कि मुझे आत्म कल्याण एवं पर को सन्मार्ग पर लगाना है! माता जी की दृढ़ शक्ति इतनी प्रबल है कि आंधी तूफान के जैसी परेशानियां आने पर भी विचलित नहीं होती!
चेतन जैन केशव राय पाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
