विज्ञान के विकास के साथ साइड इफेक्ट भी हैं, लेकिन अध्यात्म हमेशा सुरक्षित हैः मुनिश्री
अशोकनगर
अंचल के धार्मिक इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। परम पूज्य निर्यापक श्रमण राष्ट्र संत मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ (18 पिच्छिका) का शाढ़ौरा से विहार कर गुना नगर की धरा पर भव्य मंगल प्रवेश हो रहा है। अंचल में पहली बार एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जहां एक ही भव्य पांडल में एक साथ पांच स्थानों के पंचकल्याणक महोत्सव, गजरथ और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र पुण्योदय तीर्थ बजरंगगढ़ के निमित्त नशियां जी में होने जा रहा है।
इस महामहोत्सव को लेकर जैन समाज सहित सर्व समाज और तीर्थ क्षेत्र कमेटी व्यापक तैयारियों में जुटी है। कमेटी के अध्यक्ष महामंत्री सहित पदाधिकारियों ने पीढ़ीघटा पहुंचकर नपा अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता की मौजूदगी में मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।
जिज्ञासा समाधान के दौरान राष्ट्र संत श्री सुधासागरजी महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा, इस बार मैं पूरे गुना नगर का मंगल करने आया हूं, किसी एक मंदिर या मोहल्ले के लिए नहीं। मैं जहां भी बैठूंगा, गुना के जैन और जैनेतर (सभी समाजों) का कल्याण होगा। मुझे किसी सीमा में बांधने की कोशिश न करें। उन्होंने विज्ञान और धर्म की तुलना करते हुए कहा कि विज्ञान से विकास तो होता है, लेकिन उसके साथ साइड इफेक्ट भी जुड़े हैं, जबकि अध्यात्म पूरी तरह सुरक्षित है और जीवन को सही दिशा देता है। 
मुनिश्री ने बजरंगगढ़ तीर्थ के विकास पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 13 वर्ष पूर्व जो छोटा सा बीज रोपा गया था, उसे समाज ने सींचा है। आज वह लहलहाती फसल बनकर तैयार है। जैसे किसान धीरज रखकर फसल काटता है और बीज सुरक्षित रखता है, वैसे ही अब खुशियां मनाने का अवसर आ गया है। पाढाशाहजी का स्थापित तीर्थ फिर हुआ जीवंत

विवरण
पाठाशाहजी द्वारा एक हजार साल पहले जिस पावन तीर्थ की स्थापना की गई थी, वह आज पुनर्जीवित हो उठा है। ईंट-गारे से निर्मित अति भव्य विशाल जिनालय, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और संत शाला बनकर तैयार हैं। इस बार बजरंगगढ़ पुण्योदय तीर्थ के साथ-साथ नवीन गौशाला स्थित जिनालय, शीतलनाथ जिनालय और नशियां जी में विराजमान विशाल प्रतिमा का पंचकल्याणक एक साथ होगा, जो कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
