मनुष्य की स्थिति पानी की बूंद के समान होती है: आचार्य निर्भय सागर
गुना
श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, त्रिमूर्ति कॉलोनी में आचार्य श्री 108 निर्भय सागर महाराज एवं गुना नगर गौरव पूज्य मुनिश्री सुदत सागर महाराज ससंघ का तीन दिवसीय मंगल सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु, माता-बहनें एवं समाजजन सपरिवार उपस्थित होकर आचार्य एवं मुनि संघ की पियुष वाणी का पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
सोमवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 निर्भय सागर महाराज ने संगति के महत्व पर प्रेरणादायक प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की स्थिति पानी की बूंद के समान होती है। पानी की बूंद तवे पर जाए तो भाप बनकर उड़ जाती है, सांप के मुख जाए तो विष बन जाती है, सीप में में जाए तो मोती बन जाती है।कमल पत्र पर ठहरे तो उसकी आभा भी मोती जैसी हो जाती है।

संगति से बनता है जीवन का स्वरूपः
आचार्य श्री 108 निर्भय सागर महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा कि नेता की संगति में रहने वाला नेतृत्व करना सीखता है, अभिनेता की संगति में रहने वाला अभिनय की ओर आकर्षित होता है और डॉक्टर की संगति में रहने वाला चिकित्सा क्षेत्र में जाने की सोचता है। वहीं यदि कोई चोर की संगति करता है तो उसका मन भी उसी दिशा में में प्रवृत्त हो जाता है। इसलिए मनुष्य को सदैव सज्जनों की संगति करनी चाहिए, जिससे उसका जीवन, विचार और कर्म सकारात्मक बनें।


बूंद वही रहती है, लेकिन जैसी संगति मिलती है, वैसा ही उसका परिणाम होता है। यही सिद्धांत मनुष्य के जीवन पर भी लागू होता है जैसी संगति करता है, वैसी ही उसकी जीवन पर भी लागू होता है। व्यक्ति सोच, भावना और आचरण बनते हैं। अच्छे लोगों की संगति से जीवन श्रेष्ठ बनता है, जबकि कुसंगति मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालु इस सारगर्भित संदेश से भावविभोर हो उठे।



बजरंगगढ़ की ओर विहार
सोमवार को बड़े मंदिर से मुनिश्री मैधदत्त सागर महाराज एवं मुनिश्री वृभष दत्त सागर महाराज प्रभु वंदना के लिए बजरंगगढ़ की ओर विहार किया । इस दौरान जैन समाज के अनेक श्रद्धालु उनके साथ चले और मार्ग में जयकारों के साथ मुनि द्वय का भावपूर्ण अभिनंदन किया गया। विहार के दौरान वातावरण धर्ममय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
