A shirtless man with glasses speaks into a microphone from an ornate carved chair in a richly decorated temple setting.

परिवार के संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं – आचार्य विनिश्चयसागर*31 मई को होगा एक दिवसीय सिद्धचक्र विधान

धर्म

*परिवार के संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं – आचार्य विनिश्चयसागर*31 मई को होगा एक दिवसीय सिद्धचक्र विधान

 

शामली

 जीवन की सच्ची दिशा का मनुष्य के जीवन में परिवार, संस्कार और कर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। परिवार केवल संबंधों का समूह नहीं, बल्कि जीवन की पहली पाठशाला है, जहाँ व्यक्ति को प्रेम, सहयोग, अनुशासन और सदाचार की शिक्षा मिलती है। परिवार के संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। अच्छे संबंध तथा सकारात्मक सोच जीवन को सुखद और सार्थक बनाते हैं। जैन दर्शन में कर्म सिद्धांत को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य जीवन में जो भी कर्म करता है, उसका फल उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है। माता-पिता, परिवार और मित्र जीवन के सुख-दुख में साथ दे सकते हैं, लेकिन कर्मों के फल के भागीदार नहीं बन सकते। अच्छे कर्म व्यक्ति को सुख, शांति और सम्मान प्रदान करते हैं, जबकि गलत कर्म दुख और कष्ट का कारण बनते हैं। इसलिए व्यक्ति को सदैव अपने विचारों और आचरण को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। 

 

उक्त उद्गार गणाचार्य विरागसागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य वाक्केशरी आचार्यश्री विनिश्चयसागरजी महाराज ने दिगम्बर जैन धर्मशाला शामली में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।Promotional collage advertising astrological advice, featuring a woman's portrait on the left, a decorative lit diya with rose petals on the right, and bold text including the phone number 6377240323.Promotional poster for Navin Jain Print Gallery with Buddha statues, devotional pictures, and printing equipment; includes contact numbers and Hindi text.

 

 

            पूज्य गुरुदेव ने भव्य आत्माओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच उलझता जा रहा है। आवश्यकताओं की पूर्ति जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन आवश्यकता से अधिक इच्छाएँ व्यक्ति को असंतोष और तनाव की ओर ले जाती हैं। मनुष्य कई बार अज्ञान और आकर्षण के कारण गलत बातों को भी उचित समझने लगता है। परंतु जब ज्ञान और समझ का प्रकाश मिलता है, तब सही और गलत का अंतर स्पष्ट होने लगता है। जीवन में वास्तविक परिवर्तन किसी दबाव से नहीं, बल्कि सही समझ से आता है। जब व्यक्ति यह जान लेता है कि कौन-सा कार्य उसके लिए हितकारी है और कौन-सा हानिकारक, तब उसके विचार और व्यवहार में स्वतः परिवर्तन आने लगता है। समाज की उन्नति भी तभी संभव है जब व्यक्ति केवल अपने हित तक सीमित न रहकर दूसरों के कल्याण और सहयोग की भावना को अपनाए। प्रेम, सेवा और सद्भावना ही जीवन और समाज को सशक्त बनाने की वास्तविक शक्ति हैं।

 

 

             इस अवसर पर समाज के श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुनकर भरपूर आत्मीय आनंद की अनुभूति की । प्राप्त जानकारी के अनुसार आचार्य श्री के सानिध्य में रविवार 31 मई को जैन धर्मशाला में प्रातः 6 बजे से एक दिवसीय सिद्धचक्र महा मण्डल विधान की स्थापना होगी । जिसमें 108 जोड़े बैठने का निर्णय लिया गया।

 

     मनोज जैन नायक से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक कुमार जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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