आचार्य विद्यासागर जी चमत्कार नहीं करते थे उनके चरणों की धूल से चमत्कार हो जाते थे सुधासागर महाराज
दमोह
जैन मुनि चमत्कार नहीं करते चमत्कार उनकी चरणों की धूल में होता है, आचार्य विद्यासागर जी चमत्कार नहीं करते थे उनके चरणों की धूल से चमत्कार हो जाते थे। हमें भगवान नहीं भगवान की चरण की रज मिल जाए तो हमारे जीवन का कल्याण हो जाए भगवान और गुरु की चरणों की धूल बन जाओ तो जीवन में चमत्कार घटित हो जाएगा जीवन का कल्याण हो जाएगा मोक्ष महल का रास्ता मिल जाएगा हमारे जीवन में कोई ऐसा गुरु होना चाहिए जिसके लिए हम सब कुछ समर्पित कर दें उनके चरणों में सब कुछ अर्पित करने का मन बन जाए हमें ऐसा महसूस हो कि हम उनके चरणों में मिट जाएं भगवान भी वही बनते हैं जो चरणों की धूल बन जाते हैं, भक्त की यही भक्ति है जो उसे इतनी शक्ति प्रदान करती है की एक दिन उसे भगवान बना देती है प्रमोद भक्ति और आभार भक्ति के माध्यम से जीवन को उत्कृष्ट बनाया जा सकता है।
उपरोक्त विचार निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन धर्मशाला में चल रहे शिविर के अंतिम दिवस भक्तामर की क्लास में अभिव्यक्त किये। इस मौके पर दिल्ली से पधारे श्रावक ने मुनि संघ का पद
प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया मुनि संघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य युगल विद्वान डॉ अभिषेक एवं डॉ आशीष के परिवार को प्राप्त हुआ इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर व्रती आहारशाला




समिति के द्वारा कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई को श्रावक शिरोमणि पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की। इसके अलावा दमोह के युगल विद्वान डॉ अभिषेक एवं डॉ आशीष जैन को विद्या रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसी क्रम में दानवीर महेंद्र करुणा को दान रतन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समिति के अध्यक्ष रूपचंद जैन महामंत्री महेश बड़कुल मीडिया प्रभारी सुनील वेजीटेरियन मंत्री संजीव शाकाहारी के साथ नन्हे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नवीन निराला शिविर संयोजक डॉ प्रदीप आचार्य ने शाल श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर सभी को सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील वेजीटेरियन ने किया।
इस अवसर पर निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने कहा कि युवा विद्वान धर्म की प्रभावना के कार्य में बहुत सक्रियता से कार्य कर रहे हैं इनका सम्मान सभी विद्वानों का सम्मान है आचार्य भगवान का भी इनको सदैव आशीर्वाद मिलता रहा निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने भी सभी को दोनों हाथ से आशीर्वाद दिया।

शिविर के अंतिम दिवस ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में शिविराथियो ने भाग लिया निर्यापक मुनि श्री वीर सागर जी महाराज ने सभी शिविराथियोको अपना आशीर्वाद देते हुए शिविराथियो से फीडबैक लेते हुए कहा की शिविर में सीखी हुई अच्छी बातों से अपने जीवन को अच्छा बना लेना चाहिए शिविर तो धर्म और जीवन जीने की कला को सीखने के निमित्त होते हैं यह हमारे जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन कर देते हैं हमारा जीवन पूर्ण रूप से परिवर्तित हो जाता है हम अपने आप को जान करके अपने जीवन के दुखों का निवारण कर सकते हैं और अपने जीवन को उत्कृष्ट बना सकते हैं जीवन को सुख शांति के मार्ग पर ले जा सकते हैं और अधिक जीवन में अच्छाइयों को अर्जित कर सकते हैं।संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
