आर्यिका अंकम्पमती माताजी संघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न पिच्छि परिवर्तन बाहरी लेनदेन का नहीं बल्कि हृदय परिवर्तन का दिवस है अंकम्पमती माताजी
सागर
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 अंकम्पमती माताजी संघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह नेहा नगर में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बोलते हुए माताजी ने कहा कि पिच्छी परिवर्तन भारी लेनदेन का नहीं बल्कि हृदय परिवर्तन का दिवस है। उन्होंने जोड़ देते हुए कहा कि जो व्यक्ति संयम नियम लेकर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ता है उसे ही साधु पुरानी पिच्छि प्रदान करते हैं। और नई पिच्छी ग्रहण करते हैं।




पिच्छी के विषय में जानकारी देते हुए माताजी ने कहा कि वर्ष भर उपयोग करते-करते पिच्छि की मृदुता समाप्त हो जाती है। इसीलिए वर्षा योग उपरांत नई ग्रहण की जाती है। यही पिच्छी परिवर्तन कहलाता है। पिच्छी
वालो के पीछे लगे रहने पर एक दिन आप भी नवीन पिच्छी ग्रहण कर लोगे।
पिच्छी रत्नत्रय का प्रतीक है। पिच्छी मिलना सरल कार्य नहीं है। जिनके तीव्र पुण्य का उदय होता है, जो अपने जीवन में संयम धारण करते हैं, उन्हें ही पुरानी पिच्छी मिलती है।
प्रतिदिन पिच्छी को देखकर अपने भावों को विशुद्ध बनाएं, आप लोग छोटी सी टिकट लेकर बहुत बड़ा काम कर लेते हो, जीवन में धर्म को धारण करना कर्म निर्जरा का कारण बनता है।
पिच्छी जीवो की रक्षा करने के काम आती है। प्राणी रक्षा का दिवस है पिच्छी परिवर्तन।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
