देवपुरा में मुनिश्री योगसागर का मंगल प्रवास, सामूहिक पूजन और देशना में उमड़े श्रद्धालुधन नश्वर है, मनुष्य जीवन अमूल्य… इसे मोबाइल और टीवी में व्यर्थ नहीं गंवाएं: मुनिश्री योगसागर महाराज
बूंदी
निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवास इन दिनों देवपुरा में चल रहा है। मुनिश्री के प्रवास से क्षेत्र में धर्ममय वातावरण बना हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु देशना श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह अभिषेक और शांतिधारा के बाद संभवनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी की ओर से संभवनाथ भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके बाद महिला मंडल ने मुनिश्री योगसागर महाराज को शास्त्र भेंट किए। कार्यक्रम में पुण्यांशी जैन बूंदी की स्वर लहरियों के माध्यम से आचार्यश्री की सामूहिक की गई।
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य निरंतर धनार्जन में लगा हुआ है, जबकि धन नश्वर है। शाश्वत सुख को भूलकर मनुष्य जीवन को मोबाइल और टीवी में व्यर्थ गंवा रहा है।


मनुष्य जीवन संयम, साधना और मोक्षमार्ग के लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर है
मनुष्य पर्याय अत्यंत दुर्लभ है, जिसे प्राप्त करने के लिए देवता भी तरसते हैं। उन्होंने चार संज्ञाओं का महत्व बताते हुए कहा कि पंचकल्याणक में अनेक क्रियाएं सौधर्म इंद्र कर सकता है, लेकिन मुनि बनने के बाद आहार नहीं दे सकता, क्योंकि वह संयम धारण नहीं कर सकता। इससे स्पष्ट है कि मनुष्य जीवन संयम, साधना और मोक्षमार्ग के लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर है।


मंदिर कमेटी अध्यक्ष विनोद कोटिया ने बताया कि सकल दिगंबर जैन समाज देवपुरा बूंदी जैन समाज, पूर्णोदय तीर्थक्षेत्र कमेटी दादाबाड़ी व श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर कमेटी रिद्धि सिद्धि नगर कुन्हाड़ी कोटा की ओर से मुनिश्री को ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए श्रीफल भेंट कर निवेदन किया गया। मनुष्य जीवन सबसे दुर्लभ और श्रेष्ठ जन्म है। इसे केवलभोग-विलास, धन संग्रह या समय नष्ट करने में नहीं लगाना चाहिए।
मोबाइल, टीवी और मोह-माया में उलझकर आत्मकल्याण का अवसर न गंवाएं। नित्य पूजा, अभिषेक, स्वाध्याय, संयम और धर्म चिंतन से जीवन सफल बनता है। धन और वैभव नश्वर हैं, जबकि आत्मा का सुख शाश्वत है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
