श्री अशोक पाटनी आरके मार्बल ने लिया आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का आशीष जिनालय में भगवान के समक्ष भक्ति पूर्वक भाव पूजा और द्रव्य पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
जयपुर
धामनोद से दीपक प्रधान की रिपोर्ट
वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सान्निध्य में चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में मूल नायक 1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान का विधान पुण्यार्जक समर कंठाली जैन इंदौर द्वारा भक्ति भावपूर्वक संपन्न हुआ ।इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध भामाशाह आरके मार्बल के श्रीमान अशोक जी पाटनी किशनगढ़ आचार्य श्री के दर्शन कर विधान में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर धर्म सभा में आचार्य श्री ने बताया कि विधान पुण्य अर्जन का कारण है आज भक्ति भाव से द्रव्य चढ़ाए गए हैं पूजा द्रव्य एवं भावपूर्वक की जाती है भगवान चंद्र प्रभ सम्मेद शिखर से मोक्ष गए हैं ।पूजा आराधना भक्ति भाव से करने से अर्जित पुण्य मोक्ष मार्ग में सहायक होता है सभी को शक्ति अनुरूप धार्मिक कार्य करना हितकारी होता हैआचार्य संघ सान्निध्य में आचार्य श्री ,मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ,आर्यिका माताजी ने मंत्रोच्चार किए। राजेश पंचोलिया के अनुसार मंडल विधान पर विभिन्न द्रव्य श्रीफल,फल,नैवेद्य , सूखे मेवे ,पुष्प आदि से पूजन की गई।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के पूजन के पूर्व प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी एवं सभी पूर्वाचार्यों को अर्घ समर्पित किए गए। पूजन समर , सावन, संगीता पंचोलिया, आरती , निर्मला दीदी, मधु, श्रीमती सुनीता शाह, प्रहस्त ,स्पर्श ,गज्जू भैय्या लोकेश,पदम पवन भैय्या सहित संघ के भैय्या दीदी, अनेक भक्त शामिल हुए सुरेश सबलावत,भागचंद चूड़ीवाल के अनुसार प्रातःकालीन संस्कार पाठशाला में उपदेश ने बताया कि सुख संपत्ति, भौतिक वैभव धार्मिक पूजन भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, तीर्थ यात्रा, गुरु भक्ति से अर्जित पुण्य से मिलता हैं अधर्म अनीति से कमाया धन दुःख का कारण बनता है आपके कर्मों के कारण अगली पर्याय गति मिलती हैं 5 पापों से बचना चाहिए 6 प्रतिमा धारी श्राविका श्रीमती सुशीला पाटनी किशनगढ़ द्वारा भी आहार चौका लगाया जा रहा हैं।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
