सिद्धवरकूट सिद्धक्षेत्र का कण कण पवित्र है आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज आचार्य श्री के सानिध्य में हुआ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव
सिद्धवरकूट
सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट में तीन दिवसीय आयोजन के साथ आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज सानिध्य में महोत्सव के द्वितीय दिन आचार्य श्री के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुई
इस अवसर पर आचार्य श्री क्षेत्र के विषय में कहा कि सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र का कण कण पवित्र है। यहां दो चक्री दस कुमार मुनिराज सहित साढ़े तीन करोड़ मुनिराजो ने मोक्ष प्राप्त किया है।

उन्होंने कहा कि कूट के नाम से प्रसिद्ध भारत का एकमात्र तीर्थ सिद्धवरकूट हैं। भारत भूमि ढाई दीप में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां से मुनि मोक्ष ना पधारे हो। आज विदेश में जैन ग्रंथों की खोज से कई शोध किए जा रहे हैं।

यह क्षेत्र आत्मिक शीतलता का स्थान है आचार्य श्री
आचार्य श्री ने क्षेत्र के विषय में कहा कि सिद्धवरकूट तीर्थ के निर्जन स्थान का भ्रमण किया तो एहसास हुआ कि सिद्धवरकूट शांत शीतल स्थान है। यहां बाहर में भले ही तपन हो लेकिन यह आत्मिक शीतलता का स्थान है। जहां अंतर आत्मा के दर्शन हो सकते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि शिल्पकार को पाषाण में मूर्ति दिखती है, वही श्रद्धावान को पाषाण में परमात्मा दिखते हैं। हमें कभी व्यक्ति के राग द्वेष में नहीं पड़ना चाहिए। व्यवस्था मत बनाएं व्यवस्थित रहना शुरू कर दीजिए। युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि चेहरा देखकर कभी विवाह मत करना। गुण व धर्म को देखकर
विवाह करिए।


जैन गणित के अदभुत ग्रंथ सिरिभूवलय की जानकारी दी
इस अवसर पर जैन गणित का अद्भुत ग्रंथ सिरिभूवलय पर कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ज्ञानपीठ अध्यक्ष अमित कासलीवाल, प्रबंधक अरविंद जैन ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज को देते हुए पुस्तक भेट की
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



