तीर्थधाम धर्मस्थल माने जाते है,और धर्मस्थल पर्यटन के केंद्र नहीं होते है समता सागर महाराज

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तीर्थधाम धर्मस्थल माने जाते है,और धर्मस्थल पर्यटन के केंद्र नहीं होते है समता सागर महाराज
सम्मेदशिखर
तीर्थधाम धर्मस्थल माने जाते है,और धर्मस्थल पर्यटन के केंद्र नहीं होते है,वह पूजा स्थल होते है” जंहा पर पवित्रता का ध्यान रखना पड़ता है,और वह पवित्रता परिणाम और खानपान की शुद्धि से आती है” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने “गुणायतन” सम्मेदशिखर में व्यक्त किये।

 

मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं गुणायतन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र जैन छाबड़ा ने बताया 26 मई सोमवार को सोलहवें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का मोक्षकल्याणक मोक्षस्थली पर्वत पर मुनिसंध के सानिध्य में मनाया जाएगा इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि श्री सम्मेदशिखर ऐसा ही आस्था का केंद्र है यंहा पर प्रकृति का खजाना तो भरपूर भरा हुआ ही है,यहा पर संस्कृति का खजाना भी भरपूर है, संस्कृति संस्कार संपन्न होती है,जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है,और मानव को मानवता में प्रतिष्ठित करती है,ऐसी भारतीय संस्कृति सारी दुनिया में प्राचीनतम संस्कारों की संस्कृति है इस संस्कृति में शिक्षा, सेवा,परिवार समाज और राष्ट्र की बुनियादी तत्वों का समावेश है,

 

मुनि श्री ने कहा कि बसंत का मौसम आता है,तो प्रकृति हरी भरी हो जाती है और जब संत का सानिध्य मिलता है,तो संस्कृति हरी भरी हो जाती है,आप सभी इस तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर में बड़ी भावना लेकर आये है आप सभी को अपने में दया और करुणा की भावना लेकर प्राणीमात्र के प्रति सदभावना तथा खानपान में शुद्धि तथा एक दूसरे के प्रति सहयोग की सदभावना ही संतों का संदेश माना जाता है तथा विश्व में शांति का कारण बनता है।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि 42 वर्षों के पश्चात इस क्षेत्र पर आया हुं तथा पर्वतराज की वंदना की और कैसा महसूस हुआ उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है।मुनि श्री ने कहा गुरुवर के साथ की गई 27 कि. मी. की वंदना के वह दृश्य आज भी याद आते है मुनि श्री ने कहा कि मेरी इस यात्रा का लक्ष्य चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से प्रारंभ हुआ और लगभग 750 कि. मी. की निर्विघ्न और सानंद संपन्न हुई। उन्होंने पर्यटन और यात्रा में अंतर स्पष्ट करते हुये कहा कि चलने और भ्रमण करने में जो फर्क होता है वही पर्यटन और यात्रा में होता है पर्यटन प्रकृति का आनंद लेते हुये मौजमस्ती का रुप ले लेती है,जबकि यात्रा एक सार्थक उद्देश्य को लेकर के इतिहास और भारतीय पुरातत्व भारतीय शिल्प और भारतीय तीर्थधामों को लेकर के होती है,

 

प्रवक्ताअविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया समुन्नतमति,श्री मति एवं विजितमति माताजी का गुणायतन में आगमन हुआ उपरोक्त आर्यिका संघ के आहार विहार में सभी सहयोगियों का गुणायतन परिवार द्वारा श्री फल तिलक एवं वस्त्रों के साथ स्वागत किया गया। तत्पश्चात मुनिसंघ एवं आर्यिका संघ ने गुणायतन द्वारा निर्मित विश्व का पहला थीम पार्क (अनुभव केन्द्र) का अवलोकन किया।इस अवसर पर सी. ई.ओ. सुभाष जैन ने थीम पार्क (अनुभव केंद्र) की जानकारी दी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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