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मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा-धर्म-संस्कृति के साथ मानव सेवा को भी धर्म मानें, तभी मिलेगा वास्तविक संतोष

धर्म

मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा-धर्म-संस्कृति के साथ मानव सेवा को भी धर्म मानें, तभी मिलेगा वास्तविक संतोष

 मुंगावली

 

मुंगावली में विराजमान दिगंबर जैन मुनि पुंगव श्री 108सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए सेवा और संस्कृति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानव सेवा कोई अलग कार्य नहीं है, बल्कि धर्म का ही एक रूप है। जब हम समाज सेवा और परोपकार को धर्म मानकर करते हैं, तभी जीवन में सच्चा संतोष प्राप्त होता है।

 

मुनि श्री ने कहा कि हमें जो ज्ञान और संस्कार मिले हैं, वे हमारे पूर्वजों की देन हैं। उन्होंने संपत्ति के सदुपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपके माता-पिता सिर्फ आपके लिए पूज्य हो सकते हैं, लेकिन आपकी सेवा भावना उन्हें पूरे जगत में सम्मानित करा सकती है। 

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मुंगावली के वैभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के श्रावकों के पास बड़ी-बड़ी जमीनें हैं, लेकिन भगवान को स्थान देने का अर्थ अपने पिता की संपत्ति को पूज्य बनाना है। भगवान स्वयं के लिए तीर्थ नहीं बनाते, वे तो कहीं भी बैठ सकते हैं, लेकिन वे भक्त की संपत्ति को ‘तीर्थ’ का दर्जा दिला देते हैं।

 

आज मनेगा वीर सेवा दल का शताब्दी समारोह

 नगर के ऐतिहासिक वीर सेवा दल के 100 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुवार को शताब्दी समारोह आयोजित किया जाएगा। यह दल प्रदेश के सबसे पुराने सेवा दलों में सर्वोच्च स्थान रखता है। मुनि श्री के सान्निध्य में मुख्य सभा मंडल में होने वाले इस कार्यक्रम में सेवा दल के वरिष्ठ सदस्यों और समाज के प्रमुख जनों का सम्मान किया जाएगा।

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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