विदेश में रह रहे युवाओं को शंकासमाधान कार्यक्रम के माध्यम से मुनि ने किया संबोधितमाता-पिता की सेवा करने से ही जीवन बनता है सार्थक : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज
मधुबन
मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि माता-पिता की सेवा को अवसर मानना जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण दर्शन है। उन्होंने विदेश में रह रहे युवाओं को शंकासमाधान कार्यक्रम के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि केवल धन कमाना या प्रतिष्ठा पाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं है, बल्कि माता-पिता की सेवा से ही जीवन सार्थक बनता है और परिवार में सुख-शांति आती है।
मुनिश्री ने सकारात्मक भावनाओं और मंत्र जाप के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका असर न केवल मनुष्य के मन पर, बल्कि आसपास के वातावरण पर भी पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं से प्रभावित जल के प्रयोगों में देखा गया है कि सकारात्मक ऊर्जा से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है, जबकि नकारात्मक प्रभाव से विकास कमजोर हो जाता है। साथ ही उन्होंने जापानी वैज्ञानिकों के प्रयोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि सकारात्मक शब्दों से पानी के क्रिस्टल सुंदर बनते हैं, जबकि नकारात्मक शब्दों से वे विकृत हो जाते हैं। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि एक ही मार्ग पर चलने के बावजूद लोगों के परिणाम अलग-अलग इसलिए होते हैं क्योंकि उनके काम करने का तरीका अलग होता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दो विद्यार्थी एक ही पुस्तक पढ़ते हैं, लेकिन जो लगन, अभ्यास और समझ के साथ अध्ययन करता है, वही सफल होता है। इसी प्रकार व्यापार में भी सही समय पर निर्णय और संतुलित व्यवहार सफलता दिलाता है।





मुनि प्रमाणसागर महाराज ने युवाओं वि को सलाह दी कि वे नया रास्ता बीच खोजने के बजाय अपने काम करने वित के तरीके में सुधार करें।
उन्होंने कहा, “रास्ता बदलने के बजाय तरीका सुधारें और अभ्यास बढ़ाएं, तभी सफलता निश्चित मिलेगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929737312
