ब्रह्मचारिणी मधु बाला पंचोलिया का दीक्षा पूर्व इंदौर में अभिनंदन ओर गोद भराई भक्ति श्रद्धा पूर्वक संपन्न

धर्म

ब्रह्मचारिणी मधु बाला पंचोलिया का दीक्षा पूर्व इंदौर में अभिनंदन ओर गोद भराई भक्ति श्रद्धा पूर्वक संपन्न
इंदौर
मुझे बचपन से माता पिता ने मंदिर जाना ,रात्रि भोजन नहीं करना ,शास्त्र स्वाध्याय आदि संस्कार दिए विवाह होने के बाद ससुराल में धार्मिक वातावरण मिला ।नगर में आने वाले दिगंबर साधुओं की आहार चर्या में सास का सहयोग करना किया ।हमारे जेठ जी ने वर्ष 1987 में दीक्षा लेकर क्षुल्लक श्री मोती सागर जी बने। बाद में मेरी पुत्री ने भी वर्ष 2010 में आर्यिका दीक्षा ली।सांसारिक दायित्व पूर्ण कर में आर्यिका श्री ज्ञान मति जी के संघ में रहती थी मुझे आर्यिका श्री ज्ञानमती जी आर्यिका श्री चन्दना मति जी वैराग्य की प्रेरणा देती थी। 
यह उद्गार दीक्षार्थी मधुबाला पंचोलिया ने अभिनंदन सभा ने प्रगट किए। 
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की जन्म नगरी सनावद की 3 प्रतिमा धारी मधु दीदी सनावद 22 जुलाई को आर्यिका दीक्षा अयोध्या जी में ग्रहण करेंगी। आज इंदौर नेमि नगर जैन कॉलोनी में दिगंबर जैन समाज द्वारा अभिनंदन कर गोद श्रीफल,मखाना,मिश्री ,काजू किसमिस बादाम अखरोट आदि सूखे मेवो एवं फलों से भरी गई ।सुनील जैन ईशान एवं श्रीमती सावन अनुसार इंदौर दिगंबर जैन समाज के हंसमुख गांधी , भरत जैन ,निमिष जैन ,प्रदीप बड़जात्या , कैलाश लुहाड़िया , समर कण्ठाली,शांतिलाल , श्रेष्ठि जैन त्रियुग ,ललित किशोर जैन आदि अनेक समाज जनों गोद भरी इस अवसर पर अनेक वक्ताओं ने दीक्षार्थि के भावो की अनुमोदना की ।सनावद नगर के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जिन्होंने सन 1969 में मुनि दीक्षा लेकर सनावद से मुनि धर्म की शुरुआत की है तब से अभी तक देखें तो 17 भव्य प्राणी सनावद के श्रमण दीक्षा अंगीकार कर चुके हैं ।अब 64 वर्षीय तीन प्रतिमा धारी श्रीमती मधुबाला स्व प्रकाश चंद जी पंचोलिया जैन 22 जुलाई को देश की सर्वाधिक संयम धारी गणनी श्री ज्ञानमती माताजी से सर्वश्रेष्ठ नारी दीक्षा ग्रहण करेंगे।
सन 1959 को भारत के प्रसिद्ध मिर्च मंडी वेड़िया ग्राम में आपका जन्म श्रीमती सरोज बाई तिलोक चंद जी के यहां हुआ आपने लौकिक शिक्षा 10वीं तक प्राप्त की आपका विवाह सनावद के सुप्रसिद्ध श्रावक श्री प्रकाश चंद जी पंचोलिया सराफ से हुआ। आपने अपने जेठ क्षुल्लक श्री मोती सागर जी के दीक्षा अवसर दिनांक 8 मार्च 1987 पर आजीवन शुद्र जल का त्याग किया किया विवाह के बाद आपकी पुत्री चंद्रिका और दो पुत्र वैभव और विशाल हुए। पुत्री बाल ब्रह्मचारिणी चंद्रिका ने पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 14 मार्च 1993 को 5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया आपकी पुत्री ने परम पूज्य 105 गणनी आर्यिका श्री ज्ञान मति माताजी से दिनांक 17 फरवरी 2010 को आर्यिका दीक्षा हस्तिनापुर में ग्रहण कर आर्यिका श्री सुदृदमति बनी उसी दिन माता पिता श्री प्रकाश चंद जी एवम श्रीमती मधु ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से लिया आपने आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से दो प्रतिमा और 3 प्रतिमा के व्रत वर्ष 2013 मे लिए। अक्षय तृतीया जैसे पावन पवित्र दिन ब्रह्मचारिणी मधु दीदी ने परम पूज्य गणनी आर्यिका श्री ज्ञानमती जी को आर्यिका दीक्षा हेतु निवेदन कर श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। परम उपकारी, परम पूज्य गणनी प्रमुख 90 वर्षीय 71 वे वर्ष की संयम साधिका आर्यिकाश्री ज्ञानमती माताजी नेआगामी श्रावण कृष्णा एकम 22 जुलाई वीर शासन जयंती पर दीक्षा प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की। इसमें मध्यप्रदेश सनावद से मधु दीदी की दीक्षा होगी।
सनावद का आचार्य साधु परमेष्टि का गौरव शाली इतिहास
सनावद शब्द संयम के मार्ग पर नय को वर्धमान करते हुए कर्मो का दमन का संदेश देता है पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा दीक्षा लेकर वर्ष 1969 में किया गया संयम का बीजारोपण विशाल वृक्ष बन गया है इस सनावद नगर से 17 दिगंबर साधु हुए हैंराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्तजानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312

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