“तीर्थंकर भगवान धर्म तीर्थ के प्रवर्तक है, तो श्रावक दान तीर्थ के प्रवर्तकः- मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
पारसनाथ
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवे दिवस”गुणायतन में “ज्ञान कल्याणक” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ, गुरु महिमा और दान की महत्ता पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रेरणा दायी उद्ववोधन देते हुये कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक योग्य गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु ही वह पथ प्रदर्शक हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर सत्य, संयम और साधना के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी अत्यंत भाग्यशाली हैं, जिन्हें आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज जैसे महान संत का सान्निध्य प्राप्त हुआ।अपने उद्बोधन में मुनि श्री ने कहा कि गुरु के बिना जीवन की दिशा स्पष्ट नहीं हो सकती। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि आचार्य भगवन ने उन्हें भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर तक की जिन परंपरा की प्रभावना हेतु चुना और वे पिछले 38 वर्षों से समाज में संयम, साधना और आत्मकल्याण का संदेश प्रसारित कर रहे हैं।
मुनि श्री ने अक्षय तृतीया के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि मुनि श्री ऋषभसागर महाराज ने दीक्षा के पश्चात छह माह की कठोर साधना और निरंतर उपवास किया। उचित विधि से आहार न मिलने के कारण उनका उपवास छह माह तेरह दिन अंतराय के कारण और चला। अंततः 378वें दिन राजा श्रेयांस को पूर्व जन्म के पुण्य से आहार विधि का ज्ञान हुआ और उन्होंने इच्छुरस से मुनिराज का पारणा कराया। इसी घटना के कारण यह तिथि “अक्षय तृतीया” के रूप में प्रसिद्ध हुई तथा राजा श्रेयांस को “दानतीर्थ शिरोमणि” की उपाधि प्राप्त हुई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तीर्थंकर जहाँ धर्मतीर्थ का प्रवर्तन करते हैं, वहीं श्रावक दानतीर्थ का प्रवर्तन करते हैं। दान और धर्म दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं—जब तक दान
की प्रवृत्ति नहीं होगी, तब तक धर्म की स्थापना संभव नहीं है।





मुनि श्री ने यह भी बताया कि भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर तक सभी 24 तीर्थंकरों ने दीक्षा के पश्चात श्रावकों से आहार ग्रहण किया तत्पश्चात उनको केवलज्ञान की प्राप्ती हुई। यह प्रसंग श्रावकों की महिमा को दर्शाता है,और दान के महत्व को उजागर करता है।
कार्यक्रम में मुनि श्री संधान सागर महाराज, मुनि श्री सार सागर महाराज, मुनि श्री समादर सागर महाराज एवं मुनि श्री रूप सागर महाराज मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधोरा, अभय भैया आदित्य, ब्र. संजय भैया मुरैना एवं पं. सुदर्शन शास्त्री ने किया।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातः 5:45 बजे अभिषेक एवं ज्ञान कल्याणक पूजा संपन्न हुई तत्पश्चात 7 बजे से मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के मुखारविंद से भगवान के सहस्त्रनामों के उच्चारण के साथ 55 मिनट की वृहद शांतिधारा हुई, जिसमें सिंगापुर एवं मलेशिया से आए श्रावकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की तत्पश्चात पांचों मुनिराजों की आहार चर्या संपन्न हुई मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज को आहार दान दैने का सौभाग्य विवेक जैन सिंगापुर परिवार को प्राप्त हुआ।दोपहर पश्चात समवसरण की रचना हुई, जहाँ भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति का भावपूर्ण चित्रण किया गया। समवसरण से भगवान की दिव्य वाणी का प्रसारण गणधर रूप में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा किया गया।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 2 मई, शनिवार को प्रातःकाल कैलाश पर्वत से भगवान के मोक्षगमन का दृश्य दिखाया जायेगा जिसमें शरीर कपूर की भाँति विलीन होने तथा अग्निकुमार देवों द्वारा अंतिम संस्कार की पावन झांकी प्रस्तुत की जाएगी।अंत में मुनि श्री ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं सभी सिंगापुर एवं मलेशिया से आये सभी श्रावकों से कहा कि पंचकल्याणक तो संपन्न हो गया आप सभी कोई न कोई एक ऐसा नियम अवश्य लेकर जायें जो आपके जीवन का उद्धार कर सके। लाइव प्रसारण के माध्यम से जुड़े सभी भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे अपने जीवन में गुरु के प्रति समर्पण, अनुशासन और साधना को अपनाएँ, जिससे उनका जीवन भी सार्थक एवं कल्याणकारी बन सके।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
