भारतीय संस्कृति त्याग प्रधान संस्कृति है ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज
रामगंजमंडी
10 लक्षण पर्व के मंगलवार के दिन 8 दिन पूर्ण हो गए हैं आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म के रूप में मनाया गया जहां नगर के सभी जैन मंदिरों में उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। एवं तत्वार्थ सूत्र के अष्टम अध्याय का वाचन किया गया। बच्चों ने भी व्यर्थ समय न व्यतीत कर प्रभु आराधना अभिषेक पूजन किया।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य ऐलक श्री 105 क्षीरसागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रकाश डाला उन्होंने भारतीय संस्कृति को त्याग प्रधान संस्कृति बताते हुए कहा कि। अगर त्याग देखना है तो जैन संस्कृति देखो। जैन धर्म यदि चिरस्थाई है तो त्याग धर्म के कारण है। दान करने में भी जैन आगे हैं। जैनों के कारण ही अन्य लोग दान के प्रति अग्रसर होते देखे गए हैं। दान और त्याग की व्याख्या करते हुए महाराज श्री ने कहा कि दान बचा कर दिया जाता है और त्याग सर्वस्व किया जाता है। दान को प्रशंसनीय माना गया है।

और त्याग को पूजनीय माना गया हैं। संपत्ति का अर्जन कर यदि उसका भोग नहीं करते हैं और दान भी नहीं करते हैं तो वह धन और संपत्ति नाश का कारण बनती है। बिना किसी अपेक्षा के यदि दान दिया जाता है तो वह दान सात्विक दान कहलाता है। दान यदि सम्मान के भाव से किया तो वह दान नहीं होता है। महाराज श्री ने कहा कि यदि हमारी आय बढ़ती है तो दान भी बढ़ना चाहिए। कई उदाहरण के माध्यम से दान और त्याग की महत्ता को पूज्य महाराज श्री ने बताया।

महाराज श्री ने कहा कि परलोक कि यदि संपत्ति लेना चाहते हो तो दान देना आवश्यक है। दान के क्षेत्र में जो आगे बढ़ता है। तब ही वह अपना परलोक सुदृढ़ करता है। दान का यदि कोई निमित्त आए तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने सीख दी की दान करने के लिए सभी को उत्साहित करना चाहिए,ना की हतोउत्साहित। विपरीत बातों से प्रभावित होकर अपने दान की विशुद्धि को कम नहीं करना चाहिए। माता-पिता की सेवा नहीं करना और दान करना वह किसी काम का नहीं है। त्याग के विषय में महाराज जी ने कहा कि त्याग के लिए नियम लेना चाहिए। इन भावों को उन्नत कर बच्चों को भी दान देने के लिए प्रेरित करना चाहिए। ऐसे त्याग लेना चाहिए जिसमें त्याग की भूमिका हो और ऐसे त्याग करें जिससे जीवन उन्नत हो।

नगर के श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष महेंद्र ठौरा एवम महामंत्री पदम सुरलाया से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज त्याग धर्म दिवस पर प्रथम अभिषेक शांतिधारा पुण्यार्जक सुनील सुरलाया के जन्म दिवस पर इन्द्रा विनोद सुमन अमिता विवान आनवी सुरलाया परिवार एवम द्वितीय शांतिधारा पुण्यार्जक श्रीमती प्रेमलता के जन्म दिवस पर रमेशचन्द गौरव श्रेया केविका खटोड़ परिवार को प्राप्त हुआ संध्याकाल पर भक्तामर स्तोत्र से मंत्रित 48 दीपकों से महाआरती का सौभाग्य पदम कुमार प्रमिला संकेत प्रीति दुगेरिया को मिला महाआरती के पश्चात श्री वीर जैन सोशल ग्रुप द्वारा धार्मिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
