गुणायतन में तीर्थंकर अभिनंदननाथ के मोक्ष कल्याणक पर विशेष आयोजन, 27 से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव होगा शुरूसंयमित व सार्थक वाणी ही साधना का आधार : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज
| मधुबन
गुणायतन प्रणेता मुनिश्री 108प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में वाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वाणी का मूल्य तभी है, जब वह संयमित, सार्थक और सर्वहितकारी हो। उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे बोलना व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बोझ बन जाता है और उसके प्रयासों को भी कलंकित कर देता है।
मुनि श्री ने कहा कि वाणी का अतिरेक भ्रम पैदा करता है, संबंधों को बिगाड़ता है और मन की शांति छीन लेता है।इसलिए साधक के लिए मितभाषिता एक महत्वपूर्ण गुण है और आवश्यकता पड़ने पर मौन भी साधना का रूप है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सोच-समझकर, कम और सार्थक बोलना ही वाणी की पवित्रता है। उन्होंने कहा कि केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुनने के साथ चिंतन, मनन और आचरण भी आवश्यक है। 




भगवान महावीर के संदेश को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जो सुना है उसे परखकर ही जीवन में अपनाना चाहिए, ताकि व्यक्ति सही और गलत का विवेक कर सके। मुनि श्री ने यह भी कहा कि सच्चा धर्म तभी है, जब ज्ञान व्यवहार में उतरे। धर्म को जानकर उसमें प्रवृत्ति करना और अधर्म से निवृत्ति लेना ही सच्चे साधक की पहचान है।
उन्होंने कहा कि पाप से भय और धर्म से प्रेम ही साधना का प्रारंभ है, जो आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर तीर्थंकर अभिनंदननाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्रावकों ने
मोक्ष स्थल पर जाकर निर्वाण लाडू अर्पित किया। गुणायतन परिसर में प्रातः अभिषेक, शांतिधारा एवं विशेष पूजन का आयोजन किया। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया एवं अभय भैया ने किया।
सिंगापुर से आई प्रतिमाओ का भी होगा पंचकल्याणक
गुणायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 27 अप्रैल से 2 मई तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सिंगापुर जाने वाली प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
