भीषण उष्ण प्रचंड गर्मी की तपन में आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज ने किया अपने हाथों से केशो का लोचन
मंगलवाड राजस्थान
परम पूज्य आचार्य श्री 108 आर्जवसागर महाराज गुरुदेव ने सोमवार की अक्षय तृतीया की बेला में भीषण उष्ण प्रचंड गर्मी की तपन में अपने केशो का लोचन किया वह भी बिना किसी औजार के आचार्य श्री का आज उपवास रहेगा।
क्या है केशलोच
केशलोच जैन साधु-साध्वी (मुनि और आर्यिकाओं) द्वारा की जाने वाली एक अत्यंत कठिन तपस्या है, जिसमें वे अपने हाथों से सिर, दाढ़ी और मूँछों के बाल उखाड़ते हैं। यह प्रक्रिया शरीर के प्रति मोह, अहंकार और सुंदरता के आकर्षण को त्यागने के लिए साल में एक से दो बार की जाती है। यह संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है।

केशलोच की मुख्य बातें:
विधि: साधु-साध्वी बिना किसी औजार के, अपने हाथों से बालों को खींचकर निकालते हैं, जिसमें अक्सर राख का उपयोग किया जाता है।



उद्देश्य:
यह शारीरिक कष्ट को सहन करने और शरीर को नश्वर मानकर आत्म-कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने की परीक्षा है।
महत्व
: यह साधु के 28 मूलगुणों में से एक है, जो यह दर्शाता है कि साधक शरीर से उपेक्षा भाव रखता है।
केशलोच जैन धर्म के त्याग, तप और वैराग्य का एक सजीव उदाहरण है, जो आत्म सौंदर्य बढ़ाने के लिए शरीर की परवाह न करने की प्रेरणा देता है।
पंचम युग में ऐसी उत्कृष्ट साधना जैन संत ही कर सकता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
