“समता सागर महाराज संघ ने सम्मेद शिखर पहाड़ की वंदना की शिखर जी की वंदना में लाठी लेंने वाले सभी जवान बूढ़े दिखाई देते हैः- समता सागर महाराज
मधुबन
ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में तीर्थराज श्री सम्मैदशिखर के पहाड़ पर ठंडी का अहसास हो रहा था कुल्लू मनाली जैसे खुशनुमा माहौल में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री आदिसागर महाराज,ऐलक श्री निश्चय सागर महाराज, ऐलक श्री निजानंद सागर जी महाराज सहित मुनिसंघ की अगवानी में आए सैकड़ों भक्तों ने गुणायतन परिसर से तीर्थराज सम्मेदशिखर की पावन भूमी की वंदना की।
मुनि श्री को जिस स्थान से 20 तीर्थंकर मोक्ष को गये उस महान पर्वत की वंदना करने का सौभाग्य 42 वर्ष पश्चात मिला तो मुनि श्री समतासागर महाराज अपनी उन पुरानी स्मृतियों में खो गये उन्होंने उन पलों को याद करते हुये कहा कि सन्1983 में गुरुवर विद्यासागरजी महामुनिराज के साथ यहा पर बंदना करने आया था तब मैं ब्रह्मचारी था उस समय पर आचार्य श्री ने प्रत्येक टोंक पर स्वंभु स्त्रोत्र के साथ वंदना के साथ तीन परिक्रमा तथा कायोत्सर्ग कर और ऊपर देखकर पिच्छी उठाकर जोर से जयकारा करते थे तो मेंने एक स्थान पर पूछा गुरुदेव ऊपर पिछी उठाकर और देखकर जयकारा क्यू लगाते है? तो आचार्य श्री ने मुस्कुराते हुये कहा देखो इसी जगह से भगवान मोक्ष गये हुये है,और इसी जगह की सीध में भगवान विराजमान है इसीलिये उनकी तरफ देखकर जयकारा लगाकर नमोस्तु किया जाता है। ऐसे अदभुत पलों के साथ गुरुदेव के साथ वंदना हुई थी सन् 1983 की वह वंदना मुझे आज भी याद है।
मै जहा जहा आगे बढ़ रहा हूं वहा वहा वो सारे दृश्य मेरे सामने दृष्टीगोचर हो रहे है उस समय बहूत बड़ा संघ था मुनि आर्यिका तथा क्षुल्लक एवं बाल ब्रह्मचारीयो तथा आश्रम की बहनों की बड़ी संख्या के साथ तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी की वंदना की थी।

मुनि श्री ने कहा कि यह वही क्षेत्र है जहा मेंने ऐलक दीक्षा ली थी एवं कुछ माह ही बीते कि 25 नवंबर मेरी मुनि दीक्षा संपन्न हो गयी यह वही पवित्र भूमी है, मुनि श्री ने कहा देखो
“शिखर जी कि वंदना में लाठी लेने वाले सब जवान जबान बूढ़े दिखाई देते है,और सब दीदीयां दादीयां दिखाई देती है।
” मुनिसंघ ने प्रत्येक टोंक पर जाकर अपना माथा टेका और त्रयवार नमोस्तु निवेदन किया। मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा एवं गुणायतन के जन संपर्क अधिकारी
वीरेन्द्र जैन छाबड़ा ने बताया गुणायतन परिसर में मुनि श्री समतासागर महाराज मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुल सागर महाराज ऐलक श्री निश्चय सागर महाराज, ऐलक श्री निजानंद सागर महाराज सहित ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी, एवं आर्यिका दृणमति माताजी गुणायतन में विराजमान है प्रतिदिन प्रातः7-15 से अभिषेक एवं मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा तथा8:30 से मुनिसंध/ आर्यिका संघ के प्रवचन प्रतिदिन हो रहे है।
गुणायतन के अध्यक्ष विनोद काला,कार्याध्यक्ष एन. सी जैन,महामंत्री अशोक पांडया, सी ई ओ सुभाष जैन,एन एल.जैन,प्रद्युम्न जैन,शेलेन्द्र जैन,सिद्दार्थ जैन,कपूरजैन,निर्मल जैन सहित समस्त पदाधिकारियों ने मुनिसंध/ आर्यिका संघ के प्रवचनो तथा समस्त कार्यक्रम में सभी से पधारने की अपील की है।
अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






