हम क्या हैं, यह हमसे बेहतर कोई नहीं जान सकता अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज .
परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागरजी महाराज गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि लोग हमारे बारे में केवल अंदाज़ लगा सकते हैं, हमें वास्तव में जान नहीं सकते..!
एक संत अपने संघ सहित किसी गाँव से गुजर रहे थे। उन्हें नदी पार करनी थी। वहीं कुछ बच्चे रेत से खेल रहे थे। संत भी बच्चों का खेल देखने लगे। बच्चे रेत से अपने-अपने महल, मकान और घर बना रहे थे। फिर एक-दूसरे के बनाए हुए घरों को तोड़ देते, आपस में लड़ते-झगड़ते, और कुछ ही देर बाद फिर से बनाने में लग जाते। शाम होने लगी। बच्चों की माँ ने आवाज़ लगाई — अब घर आ जाओ, खाना खा लो। तभी बच्चों ने अपने बनाए हुए रेत के महल, मकान और घरों को खुद ही अपने पैरों से मिटा दिया और घर लौट गए। एक भी बच्चे ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह देखकर *संत ने अपने शिष्यों से कहा — जीवन भी इससे अलग कुछ नहीं है।
जिस जमीन-जायदाद, घर-मकान के लिए हम आपस में लड़ते-झगड़ते हैं,.जैसे ही मृत्यु की पुकार आती है, हम सब कुछ यहीं छोड़कर चले जाते हैं, और फिर कभी मुड़कर नहीं देखते।



हम जर, जोरू और जमीन के चक्कर में अपने असली आनंद को भूल जाते हैं, और इसी उलझन में पूरा जीवन व्यर्थ कर देते हैं, फिर एक दिन संसार से विदा हो जाते हैं।
वो बच्चे कोई और नहीं… आप और हम ही तो हैं…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
