Two women in white robes speak at a red-draped panel in a temple, one gesturing into a microphone set on the table.

स्वयं के कर्मों का फल स्वयं को भुगतना पड़ता है* सुरेश चंद्र गांधी नौगामा जिला बांसवाड़ा राजस्थान की रिपोर्ट

धर्म

स्वयं के कर्मों का फल स्वयं को भुगतना पड़ता है* सुरेश चंद्र गांधी नौगामा जिला बांसवाड़ा राजस्थान की रिपोर्ट

नौगामा

17 अप्रैल 2026 नौगामा नगर में विराजमान सिद्ध मति माताजी संघ सहित विराजमान है प्रातः माताजी की सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की शांति धारा अभिषेक माता जी के मुखारविंद से की गई उसके बाद माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि स्वयं किये जो कर्म शुभाशुभ फल निश्चय ही वे देते.है,अपने अपने कर्मों का फल सबको स्वयं ही भुगतना पड़ता है किसी अन्य के कारण से मुझे दुख नहीं होता मैंने स्वयं ही शुभ अशुभ शुद्ध रूप जैसे भाव किए हैं उसी प्रकार फल मिलता है जैसे लक्ष्मण ने अशुभ भाव किया तो नरक मिला सीता के जीव ने शुभ उपयोग भाव किये तो स्वर्ग की प्राप्ति की और रामचंद्र ने शुद्ध उपयोग रूप मुनि व्रत धारण करके आत्मा को जाना तो मोक्ष को प्राप्त किया|

 

 

सब जंगल में थे पर जंगल में रहकर सब अपने-अपने परिणामों के साथ में थे इसलिए परिणाम की संभाल कर अपने अभिप्राय को सुधारेंगे तो बाहर की क्रिया भी निश्चित ही सुधरेंगी |जीव अपने आत्म तत्वों को जब जानेगा तब निश्चित ही मोक्ष मार्ग में आरूढ़ होगा और मोक्ष मार्ग में लगेगा तो भूमिका के अनुसार श्रावक मुनि पद प्राप्त करके कालांतर में नियम से मोक्ष की प्राप्ति करेगा हम सब मोक्ष की प्राप्ति करें ऐसे सिद्ध श्री माताजी ने अपने प्रवचन के माध्यम से दिगंबर जैन समाज नौगामा को तत्वज्ञान का लाभ दिया. शाम को मंदिर की में आचार्य भक्ति माता जी के सानिध्य में बड़े भक्ति भाव से की गई।

          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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