हकदार बदल दिए जाते हैं, किरदार बदल दिए जाते हैं..ये 21 वीं सदी का दौर है मित्रो, यहाँ मन्नत पूरी न हो तो,रिश्ते तो क्या, लोग भगवान तक बदल लेते हैं…! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

धर्म

हकदार बदल दिए जाते हैं, किरदार बदल दिए जाते हैं..ये 21 वीं सदी का दौर है मित्रो, यहाँ मन्नत पूरी न हो तो,रिश्ते तो क्या, लोग भगवान तक बदल लेते हैं…! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

बांसवाड़ा 

मोहन कॉलोनी बांसवाड़ा राजस्थान अंतर्मना आचार्य श्री 108प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ बांसवाड़ा के मोहन कॉलोनी में विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा आप आज के पढ़े-लिखे युवक-युवतियों से तीन प्रश्न पूछिये — शिक्षा पूर्ण होने और डिग्री मिलने के बाद, आप कैसा अनुभव कर रहे हैं-?

अभी आप क्या कर रहे हैं-? और जो कर रहे हैं, क्या उससे आप संतुष्ट हैं-?

 इस कार्य के अलावा, आप अपने भविष्य को किस रूप में देखते हैं-?

 

 

इन सभी प्रश्नों के उत्तर सुनने के बाद आप एक ही निष्कर्ष पर पहुँचेंगे — अधिकांश लोग अपने कार्य से संतुष्ट नहीं हैं। मानव का मन स्वभाव से ही अस्थिर है; वह हर क्षण, हर पल भटकता रहता है। यही भटकाव मन के दुःख और चिंता का मूल कारण बनता है। भविष्य के सुखद सपनों में खोए अनेक युवक-युवतियाँ अपने वर्तमान के अमूल्य समय को व्यर्थ कर देते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपने वर्तमान कार्य को आनंद, उत्साह और समर्पण के साथ करते हैं, वही वास्तव में अधिक सुखी और संतुष्ट दिखाई देते हैं।

 

जो अपने आज के हर कार्य को ईमानदारी, उत्साह और कर्तव्यनिष्ठा से निभाते हैं, वे न केवल वर्तमान का आनंद लेते हैं, बल्कि भविष्य की चिंताओं से भी मुक्त रहते हैं। अन्यथ: “खोदा पहाड़, निकली चुहिया” वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है। माना कि इस दृष्टिकोण से जीवन जीना आसान नहीं है, परन्तु इसके अलावा कोई स्थायी उपाय भी नहीं है।एक दिन यानि 24 घंटे में – 86400 सेकंड होते हैं। इन्हें सार्थक कैसे बनाना है, यह हमें स्वयं तय करना है। कल की चिंता तो जानवर भी नहीं करते, फिर आप तो समझदार इंसान हैं।

 

_जिसने दाँत दिए हैं, वह दाना भी देगा,_

_जिसने आँत दी है, वह अन्न भी देगा,_

_जिसने भूख दी है, वह रोटी भी देगा,_

_जिसने प्यास दी है, वह पानी भी देगा।_

 

पेट की भूख तो कुछ रोटियों से मिट जाती है, लेकिन मन की भूख इस जीवन में कभी नहीं मिटती। इसलिए — राम भरोसे जो रहे, पर्वत पर हरियाय…! अंतर्मना अहिंसा संस्कार पदयात्रा परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल विहार श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, बाहुबली कॉलोनी, बांसवाडा से आज 2 अप्रेल 2026 गुरुवार शाम को 5.30 बजे श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मोहन कॉलोनी, बांसवाड़ा 2.7 किलोमीटर के लिए हुआ

। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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