आचार्य वर्धमान साग़र जी महाराज ऐसा होता है गुरु औऱ शिष्य का आत्मीय सम्बन्ध
संस्मरण
सन 1974 लाल मन्दिर दिल्ली में आचार्य श्री देशभूषन जी एवं आचार्य धर्म सागर जी मध्य में मुनि श्री वर्धमान साग़र जी महाराज भीडर कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद कार्यक्रम कीअति व्यस्तता,अति परिश्रम या असाता वेदनीय कर्म के कारण मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी की वाणी अवरुद्ध हो गई
संघस्थ सभी चिंतित हो उठे,अभी भी गुरुदेव ने पीछा नही छोड़ा कैसी कैसी कसौटी से गुजरना होगा मुनि श्री वर्धमान सागर जी को देख सब यही सोच रहे है पर फिर भी कर्मोदय को धैर्य से सहरहे है मुनि वर्धमान सागर जी महाराज। भीडर सेविहार कर संघ धरियावाद आचार्य श्री धर्म सागरजी महाराज के पास पहुँचा, मुनि श्री ने भक्ति भावसे आचार्य श्री धर्म सागर जी गुरुदेव के चरण स्पर्शकर आचार्य श्री को नमोस्तु कहा की अविरुद्ध वाणीखुल गयी, गुरु के प्रति शिष्य की अपार भक्ति ने असाता वेदनीय को भी साता में परिवर्तित कर
दिया। संघ में खुशी की लहर दौड़ गईऐसा होता है गुरु और शिष्य का आत्मीय संबंध ।
नमोस्तु गुरुदेव
वात्सल्य भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
