जो देते हैं वह लौटकर आता है स्वस्तिभूषण माताजी 

धर्म

जो देते हैं वह लौटकर आता है स्वस्तिभूषण माताजी 

   स्वस्तिधाम जहाजपुर 

 भारत गौरव, स्वस्तिधाम प्रणेत्री, तीर्थ संवर्धिका, युग प्रवर्तिका, काव्य रत्नाकर, परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माता श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम जहाजपुर मे पर्वाधिराज दसलक्षण महापर्व के अष्टम दिन :- उत्तम त्याग पर्व पर्व प्रकाश डाला 

        उन्होंने कहा जो देते है वह लौटकर आता है -उन्होंने कहा त्याग और दान प्रारम्भ में अलग होते है दान अच्छी चीज का दिया जाता है देने के बाद अपेक्षा रखी जाती है कि प्रभु इसका फल अवश्य मिले और त्याग बुरी आदत का किया जाता है जैसे शराब, जुआ, सप्त व्यसन अर्थात् पाप कर्म के छोड़ने को त्याग कहते है।

दान पुण्य है और त्याग धर्म है धर्म को समझने के लिए इसके दो भेद बताये गए है।

व्यवहार धर्म और निश्चय धर्म

निश्चय धर्म सम्पूर्ण त्याग की बात कहता है अर्थात् जैसे पाप से अशुभ कर्म आता है ऐसे अच्छे कार्यो से पुण्य कर्म आता है जब तक कर्म होगा तब तक मोक्ष नहीं होगा इसलिए सम्पूर्ण छोड़ने को त्याग धर्म कहा है तीर्थकर प्रभु को जब वैराग्य आता है तो वे वस्त्र आभूषण ,महलों का दान नहीं करते है वे त्याग करते हैंऔर उस त्याग के बदले में कुछ नहीं चाहते ये ही सच्चा त्याग है जिससे मोक्ष मार्ग मिलता है और उस पर चलने से अनन्त सुख की प्राप्ति होती है।

 

माताजी ने कहा उत्तम त्याग धर्म का दिन है आप गृहस्थी है आपसे दान रूप से त्याग कराया जाता है।दान करने से मोह कम होता है ,यदि अपेक्षा रहित होकर दिया जाय

एक व्यक्ति का मकान नहीं बिक रहा था उस ने भगवान से प्रार्थना कि भगवान मेरा मकान बिक जाये तो आधी कीमत आपकी और आधी मेरी! मकान 10 करोड में बिक गया अब उसके लोभ आ गया।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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