भरत के नाम ही पर देश का नाम भारत पड़ा, जैन धर्म युगों से है: प्रणम्यसागरजी|
सिंगोली
धार्मिक नगरी सिंगोली में आचार्य श्री 108विद्यासागरजी महाराज के शिष्य अर्हम योग प्रणेता मुनिश्री108 प्रणम्यसागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सोमवार को नगर के सकल जैन समाज द्वारा महावीर जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान मुनिश्री ने स्थानीय गौतमालय भवन के प्रांगण में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 10 वर्ष पूर्व नगर मेंमहावीर जन्मोत्सव पर विराजमान था और आज भी हूं। आज इतिहास दोहराया गया।
मुनिश्री ने धर्म का महत्व बताते हुए बताया कि ‘न धर्मों धर्मकैः विना’ अर्थात् धर्म धार्मिकों के बिना नहीं हो सकता। इस धर्म का प्रारंभ प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ से हुआ और उन के माध्यम से असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य, शिल्प आदि का ज्ञान दिया। इससे हमारे देश की अर्थ व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है एवं आदिनाथ के पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा।


यह जैन धर्म अनेक युगों से चला आ रहा है क्योंकि तभी तो आदिनाथ से महावीर तक चला। मुनि श्री प्रणम्यसागर ने कहा कि ‘धर्मो रक्षति रक्षतः धर्मः ‘जो धर्म की रक्षा करेगा धर्म उस की रक्षा करेगा। बोराव बिजोलिया चेची कांकरिया तलाई झांतला दिल्ली बेगूं आदि जगह के महिलाएं-पुरुष बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।
त्याग, तप, सत्य व अहिंसा के शाश्वत प्रतीक भगवान महावीर के जन्मोत्सव पर्व पर नगर में सकल जैन समाज ने भव्य शोभायात्रा निकाली। इसका नगर में जगह- स्वागत किया गया। महिला-पुरुष, युवक-युवतियां एवं बच्चे उत्साह के साथ जयकारे लगाते और नाचते-गाते चल रहे थे।
सोमवार को दिगंबर जैन मंदिर से शोभायात्रा प्रारंभ होकर आजाद चौपाटी, शीतला माता मार्ग, चौधरी मोहल्ला, वीर तेजाजी मार्ग, अहिंसा पथ, बापू बाजार, विवेकानंद बाजार पुराना बस स्टैंड होते हुए गौतमालय भवन पहुंचा। जहां गुरुदेव प्रणम्यसागरजी महाराज के सान्निध्य में प्रथम मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं गुरुदेव की अमृत वाणी सुनने का समाजजनों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। शोभायात्रा का तहसील परिसर के पास अंजुमन कमेटी सिंगोली ने स्वागत किया।
प्रभारी तहसीलदार बालकृष्ण मकवाना, थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा ने सुरक्षा के मद्देनजर स्वयं कमान संभाले थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
