अंधविश्वास के कारण पशुबलि न दें” – डॉ. कल्याण गंगवाल का आह्वानएकवीरा देवी के सामने बलि नहीं, भक्ति अर्पित करें; यात्रा में जन-जागृति के लिए कार्यकर्ताओं की पहल

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“अंधविश्वास के कारण पशुबलि न दें” – डॉ. कल्याण गंगवाल का आह्वानएकवीरा देवी के सामने बलि नहीं, भक्ति अर्पित करें; यात्रा में जन-जागृति के लिए कार्यकर्ताओं की पहल

पुणे (प्रतिनिधि):

 

महाराष्ट्र की जागृत देवी मानी जाने वाली कार्ला (लोणावला) स्थित कुलस्वामिनी एकवीरा देवी की वार्षिक यात्रा दिनांक 24 से 26 मार्च 2026 की अवधि में आयोजित हो रही है। इस अवसर पर देवी की मन्नत पूरी करने के लिए श्रद्धालु पशु और पक्षियों की बलि न दें और अंधविश्वास को बढ़ावा न दें, ऐसा आह्वान ‘सर्व जीव मंगल प्रतिष्ठान’ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कल्याण गंगवाल ने किया है।

 

 

 

कुलस्वामिनी एकवीरा देवी की वार्षिक यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। मन्नत पूरी करने के लिए हजारों भक्त मुर्गों और बकरों आदि की बलि देते हैं। इस प्रथा के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए डॉ. गंगवाल के मार्गदर्शन में कार्यकर्ता यात्रा स्थल पर जाकर पर्चे बाँटेंगे, बैनर लगाएंगे और साथ ही श्रद्धालुओं से संवाद कर इस कुप्रथा के प्रति उनका मन बदलने का प्रयास करेंगे।

 

 

इस संदर्भ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख मंत्रियों, कुलस्वामिनी एकवीरा देवी मंदिर ट्रस्ट के प्रमुखों के साथ-साथ जिलाधिकारी और ग्रामीण पुलिस प्रमुख को निवेदन भेजे गए हैं। यात्रा के दौरान होने वाले शराब के उपयोग और पशुबलि को रोकने के लिए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा सख्त नीति अपनाने की मांग की गई है।

 

 

 

 

महाराष्ट्र में वर्षों से कई स्थानों पर देवी के मेलों में पशुबलि देने की प्रथा चली आ रही थी। तुलजापुर की देवी और अहमदनगर जिले के पारनेर तालुका स्थित कोरथन के खंडोबा जैसे स्थानों पर भी यह प्रथा प्रचलित थी।

 

 

 

डॉ. गंगवाल ने उल्लेख किया कि देवी की मन्नत पूरी करने के लिए पशुबलि देना, वहीं मांस पकाना और प्रसाद के रूप में उसका सेवन करना, साथ ही उससे पहले मदिरापान करना जैसी घटनाओं के कारण सामाजिक और सांस्कृतिक पतन हो रहा है।

 

 

 

 

डॉ. गंगवाल ने स्पष्ट किया:

> “कोई भी देव या देवी भक्त की भावनाओं की भूखी होती है, मांस की नहीं। अंधविश्वास के कारण चली आ रही इन प्रथाओं को अब पूर्णविराम देने का समय आ गया है। पूरनपोली जैसा मीठा नैवेद्य (भोग) अर्पित करके भी श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है। किसी दूसरे प्राणी का जीव लेकर देवी कभी प्रसन्न नहीं होतीं।”

 

 

 

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यात्रा के दौरान खुले में पकाए जाने वाले मांस, बहते रक्त, दुर्गंध और फेंके गए जानवरों के अंगों के कारण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे कुत्तों, घूसों और चूहों का उपद्रव बढ़ता है, जो चिंताजनक विषय है।

इसके अतिरिक्त, भारी भीड़ के कारण भगदड़ मचने की आशंका रहती है। ऐसी दुर्घटनाओं की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए, यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से संयम बरतने, पशुबलि व मदिरापान से बचने और परिसर को पवित्र रखने का आह्वान किया गया है।

 

 

 

कानूनी प्रावधान:

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के साथ-साथ मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 105 और अदालती आदेशों के अनुसार, देवी-देवताओं के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर पशुबलि देना एक अपराध है। इसलिए प्रशासन अधिक सतर्क रहकर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाए, यह मांग भी की गई है।

 

 

 

पिछले वर्ष पुलिस ने यात्रा के दौरान शराबबंदी को लेकर सख्त कार्रवाई की थी, जिसे संतोषजनक बताते हुए इस वर्ष भी उसी कड़ाई से क्रियान्वयन की अपेक्षा व्यक्त की गई है।

 

 

कुल मिलाकर, श्रद्धा और परंपरा को बनाए रखते हुए अंधविश्वास को दूर रखना आवश्यक है। भक्तों को देवी के सामने बलि नहीं बल्कि भक्ति अर्पित करनी चाहिए, यही संदेश इस अवसर पर दिया गया है।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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