हम सब आपके लिए थककर आये है- नगर गौरव अनर्घमति माताजी

धर्म

हम सब आपके लिए थककर आये है- नगर गौरव अनर्घमति माताजी
अशोकनगर
हम सब आपके लिए थककर आये है
जहां जन्म लिया वहाँ बहुत दिनों के
बाद आना हुआ। जन्मभूमि का उपकार सभी को मानना चाहिए और उसके लिए कुछ कर सकें तो करना चाहिए। मैंने मात्र बारह तेरह वर्ष ही इस भूमि पर व्यतीत किए हैं। इसके बाद चौंतीस वर्ष आचार्य भगवान श्री विद्यासागर महाराज जी महाराज व आर्यिका रत्न श्री आदर्श मति माता जी के चरणों में कब बीत गये पता ही नही चला। जब गुरु की छांव मिल जाती है तो पत्थरीली राह भी सुगम लगने लगती है।
उक्त उद्गार सुभाष गंज में नगर प्रवेश के बाद धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए नगर गौरव आर्यिका श्री अनर्घमति माताजी ने व्यक्त किए।


आचार्यश्री की आपके नगर पर बड़ी कृपा है दुर्लभमति माताजी
धर्म सभा में आर्यिका रत्न श्री दुर्लभ मति माताजी ने कहा कि प्रातः काल आप लोग जिन मन्दिर आकर भगवान का अभिषेक पूजन आदि करते हुए कर्तव्यों की थाली को आगे बढ़ाते चल जा रहे थे, इसी तरह बड़ी माता जी कर्तव्य करते हुए अशोक नगर की ओर भीषण गर्मी में भी आगे बढ़ते हुए आज नगर प्रवेश किया। माताजी ने रास्ते में आचार्यश्री के पास संकेत भेजें और बीना मे गर्मी का कुछ समय व्यतीत करने की आज्ञा चाही तो आचार्य श्री ने कहा की नहीं आपको पूर्व संकेत के अनुसार अशोक नगर की ओर बढ़ना है। तदनुसार आपके नगर में आये है। ये आपके नगर पर आचार्यश्री की बड़ी कृपा


आचार्य श्री की दृष्टि एक्सरे की तरह भीतर का देख लेती है आदर्शमती माताजी
धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए आर्यिकारत्न श्री आदर्श मति माता जी ने कहां कि इस युग को आचार्यश्री विद्यासागर महाराजजी जैसे महान संत मिलें जो हर पल मानवता के कल्याण और सुखी होने की भावना करते रहते हैं। उनकी चरण शरण में जाने वाले सैकड़ों लोगों का उद्धार होते हुए सभी ने अपनी आंखों से देखा है। यह दुश्म काल है, चारों ओर कलुषता के माहौल में भी आचार्य श्री की दृष्टि बाहरी वैभव को नहीं देखती। उनकी दृष्टि एक्सरे की तरह आपके अंदर चल रही है। ऊह पोह को देख परख लेती हैं। और कल्याण की दृष्टि बन जगत के भले के लिए प्रेरणा देती रहती हैं। इन संकेत को हमें समझना कर कुशलता से कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आचार्य भगवंत ने अभी तक दिया है, लिया किसी से नहीं है। साधु संत आपसे क्या चाहते हैं आपके भीतर बैठी बुराईयो कुटिलता, कलुषता को बाहर निकाल कर आपके जीवन को पवित्र बनाना चाहते हैं। इसके लिए आपको भी अपनी भूमिका अनुसार योगदान करना चाहिए।


यहाँ बहुत से लोग आये और चले गए
उन्होंने कहा कि ये वो दुनिया है जहां बहुत से लोग आये और चले गए। वे अपने जीवन को संवारने का भी समय नहीं निकाल सकें। और जीवन निर्वाह में जीवन समाप्त हो गया। बाहर का परिवर्तन तो जगत का स्वभाव है। और ये प्रकृति का नियम ही है इससे आगे बढ़ने की राह आचार्य श्री ने दी। अब सभी पीढ़ियों के लिए राह बना दी। इनमें घर ग्रहस्थी छोड़ कर सभी बढ़ सकें और आपको उनकी सेवा और सीखने का अवसर मिलेगा। इस हेतु हम सब आर्यिकाए यहां आये है। और देखो इससे आगे बढ़कर भी कुछ मिलेगा।
सभा में जैन युवा वर्ग के संरक्षक शैलेन्द्र श्रगार ने कहा कि माता जी तीन सो किलोमीटर से भी लम्बा विहार करते हुए सिर्फ हमारे लिए आई है। सन् 1998मे माताजी का चातुर्मास हुआ था। और लाभ लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। एक बार फिर से वही मौका मिला है। हम सभी को इसका लाभ उठाना है


हुई भव्य आगवानी
इसके पहले आर्यिका संघ का आज प्रातः काल की वेला में नगर प्रवेश हुआ जहां समाज के प्रमुख रमेश चौधरी जैन युवा वर्ग के पूर्व प्रमुख विजय धुर्रा एस के जैन मन्दिर संयोजक डॉ डी के जैन संयोजक मनीष एमपी संयोजक अजित गुरा आशीष डब्बू, शैलेन्द्र श्रगार, विपिन सिघई,विनोद मोदी सहित अन्य भक्तों ने थूबोनजी चौराहे पर माताजी की अगवानी कर श्री फल भेंट किए। इसके बाद श्री पार्श्वनाथ मंदिर से एक भव्य जुलूस के रूप में आर्यिका संघ को गाजे बाजे के साथ नगर प्रवेश कराया गया। जहां भक्तों ने मार्ग को सून्दर सुन्दर रगोलीयो से सजाई। इस दौरान श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला की बहने, महिला मंडल, जैन युवा वर्ग, विद्या नव युवा मंडल सेवा दल के बेंड के साथ ही भक्त जनों ने आर्यिका संघ को नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गंज मंदिर लाया गया। जहां धर्म सभा का आयोजन किया गया जिसका संचालन श्री नरेश पंडित ने किया ।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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