संसार की उलझन में पड़ा था, आचार्यश्री ने मुझे पतित से पावन बना दिया। अजितसागर महाराज

धर्म

संसार की उलझन में पड़ा था, आचार्यश्री ने मुझे पतित से पावन बना दिया। अजितसागर महाराज

गढ़ाकोटा

पूज्य मुनि श्री अजितसागर महाराज का 24 वा दीक्षा दिवस क्षमाधाम पर मुनि श्री सानिध्य मे मनाया गया इस अवसर मुनि श्री ने गुरु के प्रति जो उदगार प्रकट किये व भाव विभोर कर गए उन्होने कहा चलते समय यदि कोई बोलने वाला मिल जाए तो रास्ता सहज हो जाता है उसी तरह यदि रास्ता बताने वाला मित्र मिल जाए तो रास्ता और जल्दी कट जाता है

उन्होने आगे कहा गुरु ही मोक्षमार्ग का एसा ही साथी एवम दिशा निर्देशक है अपनी दिव्य देशना मे उन्होने जो कहा वह सुन सभी भाव विहल हो गए उनकी वाणी से सचमुच ऐसा लगा की गुरु के प्रति शिष्य का समर्पण परीलक्षित करता है उन्होने कहा मै तो संसार की उलझनों मे पडा था आचार्य श्री ने मुझे पतित से पावन बना दिया दीक्षा हुए 24 वर्षो को स्मरण में लाते हुए कहा दीक्षा हुए 24 वर्ष हो गए पता ही नहीं चला मानवीय कर्तव्यो की और ध्यान दिलाते हुए कहा मावव का सबसे बड़ा कर्तव्य है की वह आत्म कल्याण करे उन्होने आगे कहा संसार मे मनुष्य तन को पाकर जैन कूल मे जन्म लेकर दीक्षा मिलना मनुष्य जन्म की सबसे बड़ी उपलब्धि है उनके संयम दीक्षा दिवस पर सभी को संयम पथ की सीख देते हुए कहा हमे अपने जीवनकाल मे कभी न कभी संयम के पद पथ पर अग्रसर अवश्य होना चाहिए

विवरण

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पावन आशीष से आचार्य श्री के कर कमलो से शुभ तिथि वेशाख शुक्ल सम्पतमी 22 अप्रैल 1998 को सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर मे 23 मुनि दीक्षाए सम्पन्न हई थी तिथि के अनुसार रविवार को  गढ़ाकोटा नगर गोरव अजित सागर महाराज का दीक्षा दिवस अभूतपूर्व उल्लास से मनाया गया

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *