सुसंगति और सुसंस्कारों से ही जीवन में निखार योगसागर महाराज 

धर्म

सुसंगति और सुसंस्कारों से ही जीवन में निखार योगसागर महाराज 

   सरवाड़ 

ज्येष्ठ मुनिश्री निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108योग सागर महाराज ने शनिवार की बेला में संघ सहित सरवाड़ में मंगल प्रवेश हुआ। 

 

 

 मुनिश्री ने संघ सहित शनिवार सुबह ग्राम सूरजपुरा से विहार किया। वे जगपुरा होते हुए चमन चौराहा पहुंचे। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा आदिनाथ की जयकारों के साथ उनकी अगवानी की। उन्हें जुलूस के रूप में आदिनाथ भवन तक लाया गया। ढोल-बाजों के साथ निकले जुलूस में युवा व मंगल गीतों की स्वर लहरियां बिखेरते हुए चल रहे थे। एवम महिलाएं चल रही थी। जुलूस लिंक रोड़, बस स्टैंड, सदर बाजार, चंद्रप्रभु बाजार, गोपीनाथ मंदिर व आदिनाथ मंदिर होता हुआ आदिनाथ भवन पहुंचा।

 

 

 

भवन पर समाज के अध्यक्ष टीकमचंदअजमेरा व सचिव महेन्द्र जैन की अगुवाई में समाज की ओर से मुनि संघ की अगवानी पद प्रक्षालन मंगल आरती की गई।

 

  

 

आदिनाथ भवन में धर्म सभा में मुनि प्रवर 108 योगसागर महाराज ने कहा कि जीवन में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। प्रबल पुरूषार्थ से कोई भी स्वयं को बड़ा बना सकता है। जीवन में देव, गुरू व धर्म की आराधना महत्वपूर्ण है। मन के सारे कषाय और विकार समाप्त होने पर ही प्रभु भक्ति में मन रमेगा। उन्होंने कहा कि सुसंगति और सुसंस्कारों से ही जीवन निखरता है।

 

          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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