मित्र मरने के पहले अगले भव की व्यवस्था बना लो मुनि श्री सुव्रतसागर जी


‘उलझी हुई जिंदगी से
कुछ पल,सुकून के निकालो,
पलभर बैठकर, स्वयं को सँभालो,
सोचो- जरा-सोचो,मैं कौन ? कहाँ से आया ?
कहाँजाऊँगा? मित्र!मरने के पहलेअगले भव कीव्यवस्थित
व्यवस्था बना लो।”
रचयिता श्रुतसंवेगी सुव्रतसागर महाराज
श्री हो श्री।
