मित्र मरने के पहले अगले भव की व्यवस्था बना लो मुनि श्री सुव्रतसागर जी

काव्य रचना

मित्र मरने के पहले अगले भव की व्यवस्था बना लो मुनि श्री सुव्रतसागर जी

               

‘उलझी हुई जिंदगी से
कुछ पल,सुकून के निकालो,
पलभर बैठकर, स्वयं को सँभालो,

 

 

 

सोचो- जरा-सोचो,मैं कौन ? कहाँ से आया ?

कहाँजाऊँगा? मित्र!मरने के पहलेअगले भव कीव्यवस्थित
व्यवस्था बना लो।”
रचयिता श्रुतसंवेगी सुव्रतसागर महाराज
श्री हो श्री।

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