अश्रुपूर्ण नयनों से ‘युगल आचार्यों’ को दी गई विदाई: णमोकार तीर्थ से मांगीतुंगी की ओर मंगल विहार
औरंगाबाद /णमोकार तीर्थ (संवाददाता):
अध्यात्म के पावन केंद्र णमोकार तीर्थ (मालसाने-चांदवड) में राष्ट्रसंत आचार्य श्री १०८ देवनन्दि जी महाराज के पावन निर्देशन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव का भव्य एवं ऐतिहासिक समापन हुआ। 75 दिनों के भक्तिमय प्रवास के बाद, अपने गुरु के स्वप्नों को पूर्ण कर युगल आचार्य श्री अमोघकीर्तिजी एवं श्री अमरकीर्तिजी ने सिद्धक्षेत्र मांगीतुंगीजी की ओर मंगल विहार किया।
भावुक कर देने वाले विदाई के क्षण
विदाई के समय समूचा णमोकार तीर्थ भक्ति और वैराग्य के रंग में डूबा नजर आया। विदाई समारोह के दौरान युगल आचार्यों द्वारा परम पूज्य गुरुदेव का अष्ट द्रव्यसे पूजन आरती , पद प्रक्षालन किया गया और शास्त्र भेंट किए गए। इस अवसर पर युगल आचार्यों ने अपने प्रवचन में अत्यंत विनम्रता के साथ सभी से क्षमायाचना की। विदाई की बेला में गुरुदेव, मुनिराज, माताजी, वैशाली दीदी और उपस्थित भक्त परिवार की आँखें लबालब आँसुओं से भर आईं।


गुरुदेव का पावन संदेश
आचार्य श्री देवनन्दिजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा:
” युगल मुनी आने से पंचकल्याणक कार्यक्रम मुझे दाये और बाये हाथ मिल गये कार्यक्रम मे चार चांद लग गये lयुगल आचार्य तीर्थ यात्रा संप्पन्न कर वापस आकर तीर्थक्षेत्र की जिम्मेदारी संभालणी है ऐसा कहकर णमोकार तीर्थक्षेत्र सभी शिष्यों और णमोकार भक्त परिवार का है। आप जब भी चाहें यहाँ आएँ, अभिषेक, पूजन और भक्ति कर अपने जीवन का उद्धार करें। आप सभी के तन, मन और धन के सहयोग से ही यह पंचकल्याणक महोत्सव इतनी धूमधाम से संपन्न हुआ है।” यह कहकर आपका जीवन उज्वल और सुखमय रहे ऐसे मंगल आशीर्वाद दियेl



विशेष उपस्थिति और आवाहन
मांगीतुंगीजी ट्रस्ट कमेटी की ओर से श्रीफल भेंट कर आचार्यों से विहार की विनती की गई थी। बाल ब्रह्मचारी वैशाली दीदी एवं णमोकार ट्रस्ट कमेटी ने युगल आचार्यों का पद प्रक्षालन कर क्षमायाचना की।

प्रचार संयोजक पारस लोहाडे ने जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक और अनूठे क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने भारी मन से आचार्यों को मंगल विहार की विदाई दी।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
