मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज के हुए केशलोच 

धर्म

मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज के हुए केशलोच

रामगंजमंडी

परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज एवम आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज ने सोमवार प्रातः बेला में अपने केशो का लोचन किया

 

 

केशलोच एक साधना है

केशलोच एक साधना तपस्या है जो केवल दिगंबर संत ही कर सकता है पंचम युग में ऐसी साधना सहज नहीं है बिना किसी उपकरण के अपने हाथों से केशो का उखाड़ना केवल बानी एवम राख का उपयोग करते हुए

मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज साधना तपस्या के सतत प्रहरी है केशलोच प्रक्रिया

: जैन साधु उस्तरा या मशीन का उपयोग नहीं करते। वे अपने बाल स्वयं हाथों से उखाड़ते हैं (केशलोच), जो शरीर के प्रति मोह और वेदना पर विजय का प्रतीक है।

 

 

चारित्रिक शुद्धि: केशलोच की प्रक्रिया मुनियों के वैराग्य, संयम और शारीरिक पीड़ा सहन करने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।

साधुओं के 28 मुलगुणों में कैशलोच होता है

इक बार दिन में ले आहार खड़े अलप निज ध्यान में

कच लाँच करत न डरत परिषह सो लगे निज ध्यान में

केशलोच के विषय में प्रकाश डाले तो आपको बता दे दिगंबर संत स्वावलंबी होते है, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं कीसाधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों न हो, वे समभाव मेंउसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते है।

 

साधना साधना के रास्ते कामना के वास्ते चल दे राही चल जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं।

जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *