प्रभु मौन रहते हैं, मार्ग का निर्देश गुरु करते हैं:विनिश्चय सागर महाराज
पानीपत
आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का गुरुवार को बड़ा जैन मंदिर, जैन मोहल्ला में मंगल प्रवेश हुआ। जहां जैन समाज के लोगों ने विनत भाव से पाद प्रक्षालन कर अपने जीवन को कृतार्थ किया।
आचार्य, श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि मानव के हृदय में श्रद्धा, समर्पण तथा भक्ति सहज प्रकट नहीं होती। इसके लिए संसार की वास्तविकता का सम्यकू परिचय, पारिवारिक तथा सांसारिक मोह का क्षय तथा देव, शास्त्र, गुरु की निष्ठापूर्वक
आराधना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान तथा सम्यक् चरित्र ये त्रिरत्न जीवन की परम निधि हैं।
जिसने इन्हें आत्मसात कर लिया। उसके लिए संसार-सागर लघु प्रतीत होता है। गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि आत्मकल्याण की भावना जागृत कर सत्य का साक्षात्कार करना ही मानव जीवन का परम पुरुषार्थ है। प्रभु मौन रहते हैं, मार्ग का निर्देश गुरु करते हैं। गुरु कृपा से ही जीवन की दिशा परिवर्तित होती है तथा चेतना में जागृति आती है। 



एक दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन
एक मार्च में रवि पुष्यामृत योग के पावन अवसर पर गुरुदेव श्रीमुख से एक दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान संपन्न होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
