तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी का 58वाआचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया।

धर्म

तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी का 58वाआचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया।

पदमपुरा प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में 33 पीछी विराजित हैं आचार्य संघ गणनी आर्यिका श्री सरस्वतीमति, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी संघ सानिध्य में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी का 58 वा आचार्य पदारोहण उनसे सन 1969 में दीक्षित शिष्य वर्तमान पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में विशाल पंडाल में हजारों भक्तों की महती उपस्थिति में मनाया गया।

आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी का गुणानुवाद कर बताया कि 58 का अंक में 2 अंक 5 ओर 8 का योग 13 होता हैं आगम अनुसार दिगम्बर मुनियों का 13 प्रकार का चारित्र बताया है यह चारित्र मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायक है।यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी के 58 वे आचार्य पदारोहण के अवसर पर पदमपुरा में प्रगट की।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि गुरु का गुणानुवाद करना शिष्य का कर्तव्य है क्योंकि गुरु गुरु होता है और शिष्य शिष्य हम जो भी हैं हमारे गुरु की शिक्षा ज्ञान स्नेह कारण है।प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने श्रावकों समाज ओर मुनियों के लिए आदर्श मार्ग दर्शन दिया।स्वयं ने उस मार्ग पर चलकर धर्म की अद्भुत धर्म प्रभावना की। 36 दिन की कुंथल गिरी में संलेखना कर उपदेश भी दिया। आपकी समाधि के बाद प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी की समाधि के बाद श्री शिव सागर जी द्वितीय पट्टाचार्य बने। धर्म प्रभावना के लिए श्री धर्म सागर जी ने पृथक बिहार किया। अनेक भव्य लोगों को दीक्षा शिक्षा दी उन्हें समाज ने भी आचार्य पद लेना चाहा किंतु दृढ़ता से नहीं लिया। सन 1969 के प्रसंग ने भावी आचार्य जैसे मनोनीत किया, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संस्मरण बताया कि हम संघ में ब्रह्मचारी अवस्था में थे तब हम सहित 11 भव्य प्राणियों ने दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ा कर निवेदन किया आचार्य श्री शिव सागर जी अचानक बीमार होने से संघ चिंतित हुआ तब आचार्य श्री शिवसागर जी ने कहा में स्वस्थ होकर 11 दीक्षा दूंगा, यदि नहीं दे सका तो वरिष्ठ मुनि श्री धर्म सागर जी दीक्षा देंगे। इन वचनों ने जैसे भावी आचार्य मनोनित कर दिया और गुरु की इस इच्छा का पालन कर उनकी समाधि होने पर तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी को बनाया। क्योंकि यह मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा रही सभी पूर्वाचार्य भी बाल ब्रह्मचारी थे। आचार्य श्री धर्म सागर जी के अनेक गुण संस्मरण बता कर इनके वितरागी, भोले, परोपकार, निस्पृहीता, गुण बताए। सन 1974 देहली श्री महावीर स्वामी निर्वाण महोत्सव में कभी भी दिगम्बर समाज संस्कार की क्षति नहीं होने दी। पंडित धर्मचंद शास्त्री, के कुशल निर्देशन में आचार्य श्री धर्म सागर के महामंडल विधान की पूजन दोपहर को सौधर्म इंद्र श्री दीपक ,श्रीमती पूनम पाटनी कोलकाता सपरिवार,कुबेर इंद्र, महायज्ञ नायक, डॉ जगमोहन श्रीमती वर्षा हुमड कनाडा, यज्ञ नायक श्री आशीष श्रीमती मनीषा धार सहित सैकड़ों इन्द्र परिवार ने तृतीय पट्टाचार्य श्री धर्म सागर जी की भव्य पूजन प्रारंभ की।पूजन का मंत्रोच्चार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं आर्यिका श्री महायश मति एवं अन्य साधुओं ने किया। महामंडल की सुंदर रचना विभिन्न धान अनाज से की गई। विभिन्न अष्ट द्रव्यों की विशेषता रही।इन अष्ट द्रव्यों में 58 जल के दिव्य कलश, 58 चंदन के कलश ,58 बड़े बड़े अक्षत थाल, 58 तरह के देश विदेश के असली फूल के थाल, 58 प्रकार के नैवेद्य अनेक प्रकार की मिठाई 58 दीपक,58 धूप,58 फल,सूखे मेवे ,58 अध्र्य चढ़ा कर जयमाला हुई। विधान के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन हुई।देहली के कलाकार द्वारा आचार्य श्री धर्म सागर जी की गौरव गाथा का मंचन हुआ। विनयांजलि सभा में भरत जैन इंदौर ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से वर्ष 2027 का वर्षायोग करने हेतु निवेदन किया। वर्ष 2026 में वर्षायोग हेतु किशनगढ़ के 500 से अधिक भक्तों, सीकर के 400 से अधिक भक्तों जयपुर बड़के बालाजी , निवाई, ने निवेदन किया। भींडर जैन समाज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हेतु निवेदन किया आज श्रावक श्राविकाओं ने अणुव्रत हेतु श्रीफल चढ़ाया । आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागरजी को आदर्श बताया कि उन्होंने स्वयं के 58 वे दीक्षा दिवस के बजाय दीक्षा गुरु का 58 वा आचार्य पदारोहण गुरु उपकार दिवस मनाया। श्रवण बेलगोला जैन मठ के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी एवं अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी द्वारा प्रेषित विनयांजलि का वाचन मुनि श्री हितेंद्रसागर जी एवं मुनि श्री प्रभवसागर जी ने किया।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन श्री राजेंद्र कटारिया, राजेश शाह अहमदाबाद, श्री विवेक काला , श्री सुनील अग्रवाल , श्री सुरेश सबलावत, जयपुर, श्री गजराज गंगवाल देहली , श्री विमल पाटनी उरसेवा,श्री संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, श्री कमलेश मालवीय सलूंबर, श्री भरत इंदौर, ने तथा जिनवाणी श्री राजकुमार , श्री जय कुमार दोषी किशनगढ़ ने किया।कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य श्री धर्मचन्द शास्त्री, एवं वसंत वेद किशनगढ़ ने किया। प्रतिष्ठाचार्य श्री धर्मचंद शास्त्री का सम्मान हुआ। अतिथियों ने आचार्य श्री धर्मसागर अभिवन्दन ग्रन्थ का विमोचन किया। इस अवसर पर राजस्थान के निवाई,टोंक,भिंडर, धरियावद, पारसोला, सलूंबर, जयपुर, सुजानगढ़,किशनगढ़ इंदौर, आसाम, देहली, कलकत्ता, अहमदाबाद, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कनार्टक, आदि अनेक राज्यों से हजारी भक्त पधारे।

राजेश पंचोलिया इंदौर

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