तारगा तीर्थ पर आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज आर्यिका पवित्रमति माताजी एवम आर्यिका सुदृढ़मति माताजी समागम विनय सम्पन्नता का जीवंत उदाहरण बना
तारगा
साढ़े करोड़ मुनियों की निर्वाण भूमि है तारगा जिसकी वंदना कर त्यागी तपस्वी संत नर नारी हर कोई अपने को पुण्यशाली एवम सौभाग्यशाली मानता है।
उसी का क्षण आज देखने को मिला जब तीर्थ की वंदना हेतु आर्यिका 105 विज्ञानमति माताजी संघस्थ आर्यिका 105 पवित्रमति माताजी एवम आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज से दीक्षित आर्यिका 105 सुदृढ़मति माताजी संघ सहित पधारी उन्होंने तीर्थ वंदना की

विनय सम्पन्नता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत हुआ
तीर्थ वंदना उपरान्त दोनों माताजी संघ ने क्षेत्र में पूर्व में विराजित आचार्य श्री 108 आर्जव सागर महाराज के दर्शन कर वंदना की उस समय उन्होंने भाव पूर्वक नमन किया यह दृश्य विनय सम्पन्नता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर गया 


आचार्य श्री से उन्होंने काफी समय तक धर्म चर्चा की जो वात्सल्यता का जीवंत प्रमाण तो परिलक्षित तो कर ही रहा था साथ ही विनय सम्पन्नता का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर गया उस समय मौजूद भक्त काफी भाव विहल हो उठे और इन दृश्यों को एक टक निहारते रहे। 



संत समागम के ये पल जीवंत जाग्रति लाती हैं और समाज को एक नई दिशा जागृति प्रदान करते हैं। जो युगों युगों तक एक इतिहास बना देते है। जो अविस्मरणीय पल बनकर सदा सदा अंकित रहते हैं।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
