मोक्षमार्ग आपके परिणामों के वेलेन्स का मार्ग है यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते है संभव सागर महाराज

धर्म

“मोक्षमार्ग आपके परिणामों के वेलेन्स का मार्ग है यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते है संभव सागर महाराज 

विदिशा

मोक्षमार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते है” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज ने अरिहंत विहार दि. जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होंने सर्कस का उदाहरण देते हुये कहा कि आप लोगों ने देखा होगा किस प्रकार से खिलाड़ी बैलेंस बनाते हुये खेल दिखाता है।जरा सी चूक उसकी जानलेवा सिद्ध हो सकती है,उसी प्रकार साधक को अपनी दैनिक क्रिया करते समय अपने 28 मूलगुणों तथा पंच महावृतों के पालन का पूर्ण ध्यान रखना पड़ता है,

 

 

मुनि श्री ने कहा कि कल आप लोगों ने देखा होगा किस प्रकार से”आचार्य प्रवर समय सागर महाराज ने मूल संघ के संस्थापक आचार्य कुंद कुंद की वीतरागी निर्ग्रंथ परंपरा में आचार्य शांतिसागर,आचार्य वीरसागर,आचार्य शिवसागर,
आचार्य ज्ञानसागर की परंपरा के आचार्य विद्यासागर जी की परंपरा का निर्वाहन करते हुये “मुक्तागिरी” में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया” वर्तमान के संघ नायक आचार्य श्री समयसागर महाराज जब 22 साधकों को निर्ग्रन्थ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे थे,तो ऐसा लगा कि समय मानो थम सा गया है, विदिशा से सेकड़ो की संख्या में पहुंचे लोगों ने यह दृश्य प्रत्यक्ष जाकर देखा,और बहूत बड़ी संख्या में सभी लोग अपने बड़ी टी.व्ही पर विद्याकुल में वृद्धि के दृश्यों को देख रहे थे, मुनि श्री ने दीक्षा विधी को बताते हुये कहा दीक्षा दैने के पूर्व सभी साधक संसार में रहते हुये राग द्वैष के निमित्त जो भी परिणाम उनके विचलित होते है वह सभी सांसारिक सम्वंधों जैसेअपने गृहस्थ जीवन के मातापिता,भाई बंधु एवं सभी परिवारी जन एवं इष्टमित्रों एवं समस्त जीवों से क्षमायाचना करते है, तथा सभी को क्षमा प्रदान करते है, इसके पश्चात ही दीक्षाविधी को प्रारंभ होती है, तत्पश्चात आचार्य गुरुदेव गंधोदक,केसर और कपूर मिश्रित उबटन लगाकर जैसे भगवान की प्रतिष्ठा की जाती है,उस अनुसार केशलोंच विधी संपन्न कर मस्तक पर श्री कार तथा अंकलेखन कर वस्त्र विमोचन का आदेश देते है,प्रत्येक साधक को दो,तीन, और चार माह में उपवास के साथ अपने हाथों से कैशलोंच करना अनिवार्य होता है,

 

धर्मसभा में निर्यापक मुनि श्री संभवसागर महाराज ने सकल दि. जैन समाज समिति के सभीपदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुये कहा कि आप लोगों नेजो मुक्तागिरी पहुंचने की व्यवस्थित व्यवस्था की उससे कयी लोग प्रत्यक्ष दर्शन का लाभ उठा पाऐ उन्होंने कहा कि गुरुवार का दिन बहूत शुभ था फाल्गुन माह दौज की तिथी थी,ऐसे शुभ संयोग के साथ मुक्तागिरी में हमारे संघ नायक आचार्य श्री समयसागर महाराज ने आचार्य बनने के पश्चात जिस प्रकार से 22 निर्ग्रन्थ मुनि महाराज को दीक्षा देकर आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज की वंशवेल को आगे बढ़ाया है, यह हम सभी के लिये बहूत बडे़ गौरव की बात है उससे आज समूची जैन समाज गौरान्वित महसूस हुई है उन्होंने कहा इसी स्थान से आचार्य गुरुदेव ने फरवरी माह 1998 को 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी और पुन्हा 28 साल बाद यह इतिहास दौहराया,यह पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है।प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया जैसे ही सभी 22 साधकों ने एक साथ अपने अपने वस्त्रों को उतारा तो ऐसा लगा कि जैसे कालचक्र रूक गया है,सभी साधक समयसार की अनुभूति करते हुये सिद्धत्व के भावों की अनूभूति कर रहे थे, उनकी खड़गासन निर्ग्रन्थ वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा वह उस दृश्य को देखता ही रह गया,अपार जनसमूह के साथ गगनभेदी नारे गुंजायमान हो रहे थे,

आचार्य गुरुदेव ने आगे दीक्षा विधी की क्रियायें संपन्न कराते हुये उनको बैठने का संकेत दिया और उनके हाथों में श्रीफल देकर 28 मूलगुणों को आरोपित करते हुये उसके महत्व को समझाया तथा सभी साधकों को आगे की चर्या समझाते हुये पिच्छी एवं कमंडल मंत्रोच्चारण के साथ प्रदान किये तथा पांच महावृत एवं सभी समितियों के पालन करने का निर्देश दिया। प्रवक्ता अविनाश जैंन ने बताया मुक्तागिरी तीर्थ पर सैकड़ो की संख्या में चार पहिया वाहन एवं सैकड़ों बसों का प्रवंधन के लिये निश्चित करके मुक्तागिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी धन्यवाद की पात्र है,आज दौनों पांडाल ठसाठस भरे हुये थे एवं हजारों की संख्या में लोग पांडाल के बाहर धूप में खड़े हुये थे लगभग चालीस से पचास हजार की उपस्थिति इस बात का प्रमाण था कि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज आचार्य समय सागर महाराज के रुप में आज भी विद्यमान है। लाखों की संख्या में जिनवाणी एवं पारस चैनल के माध्यम से देश तथा विदेश के विभिन्न हिस्सों से इस अदभुत दृश्य को देखकर अभिभूत हुये।
(अविनाश जैन विद्यावाणी) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *