विधिनायक श्री आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आर्यिका दीक्षा दी।दोपहर को सम्यक समाधि मरण

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विधिनायक श्री आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आर्यिका दीक्षा दी।दोपहर को सम्यक समाधि मरण

पदमपुरा (जयपुर) क्षेत्र पदमपुरा में वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 पिच्छिका सहित विराजित है। समस्त आचार्य संघ ,गणिनी आर्यिका श्री सरस्वती मति ,गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी संघ कमेटी ,परिजनों समाज की उपस्थिति में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा पंच कल्याणक में जन्म कल्याणक दिवस पर विगत सोमवार को 72 वर्षीय ब्रह्मचारिणी मनोरमा जी का मनोरथ पूर्ण कर श्री वासु पूज्य भगवान के जन्म और तप कल्याणक दिवस पर क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की थी,आज 19 फरवरी को विधि नायक आदि नाथ के जन्म कल्याणक दिवस पर आर्यिका दीक्षा देकर आर्यिका श्री वासु पूज्य मति नामकरण किया।

गुरुभक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रशंसनीय बात यह है कि दीक्षा के पूर्व से मनोरमा जी 9 फरवरी से निर्जला उपवास करते हुए 19 फरवरी को आर्यिका दीक्षा दिवस पर 11 उपवास है। अभी भी पूर्ण चेतना स्मरण शक्ति है 19 फरवरी दोपहर 4,30 कोआचार्यश्री संघ,आर्यिका संघ में आपका सम्यक समाधि मरण हो गया।

सामान्य परिचयगृहस्थ अवस्था के पति श्रेष्ठी श्री सम्पत लाल अजमेरा बूंदी ने बताया कि बूंदी के श्रीमती सौसर देवी श्रेष्ठि श्री नाथु लाल शाह के 2 पुत्र चार पुत्रियों में दूसरे नंबर पर मनोरमा का जन्म 7 जुलाई 1954 को हुआ। आपने लौकिक शिक्षा मैट्रिक कर ग्रहण की। आपका विवाह बूंदी के श्री संपत कुमार अजमेरा से हुआ। पुत्र पुत्री नहीं होने से मनीष को गोद लिया। आपने 1 फरवरी 2003 को अध्यापिका पद से त्याग पत्र देकर शुद्ध जल ग्रहण करने नियम लिया। वर्ष 2007 में आप दोनों ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। गृहस्थ अवस्था में श्रीमती मनोरमा से बड़े भाई स्व, श्री कैलाश चंद, आपसे छोटी बहन श्रीमती रानी, श्री अशोक(भाई),श्रीमती संतोष, एवं श्रीमती सुनीता है

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