मनुष्य जीवन को सुधारने में साधु केउपदेश प्रेरणादायक : विनम्र सागर
मदनगंज किशनगढ़
मुनिश्री 108विनम्र सागर महाराज ने आदिनाथ कॉलोनी स्थित सन्त शाला में धर्मोपदेश देते हुए कहा कि धर्म का ज्ञान मंदिर व संतों के माध्यम से मिलता है। साधु के साथ शहर में सम्यक चारित्र, सम्यकज्ञान, सम्यक दर्शन साथ आते हैं। संस्कार केअभाव में मनुष्य गलत मार्ग पर चलता है। देव,शास्त्र, गुरु तीनों की संगति होने के बाद भी सप्त व्यसन करता है, तो वह सबसे गिरा हुआ श्रावक होता है। मनुष्य के जीवन को सुधारने में साधु के उपदेश प्रेरणा दायक है।
मुनिश्री ने बताया कि साधु के अनुपस्थिति में समाज का नैतिक व चारित्रिक पतन होता है।परिवार के लोगों द्वारा परिवार को धन व प्रवृत्ति का धर्म देने के साथ प्रकृति का धर्म भी देना चाहिए।मनोवैज्ञानिक जीवन जीना जैन समाज की पहलीभूमिका रही है।
मन, वचन, काया का ब्रह्मचर्य होता है। 



मुनिश्री ने कहा कि रूप, रुपैया, रुतबे सेजिंदगी चलती है। अपने पैसे से पुण्य का भोगकरना चाहिए। इच्छाएं इंसान को धर्म मार्ग सेभटकाती है। मुनिश्री ने कहा कि आंख खोलकरसंसार नहीं देखना चाहिए, संसार को आंख बंदकरके देखना चाहिए, क्योंकि भगवान आंख बंद सब कुछ देख रहा है। जीवन में ऐसा कार्यकरो कि अपने पुरुषार्थ के पुण्य भोग सके।


धर्मसभा में मुनि निस्वार्थ सागर महाराज नेआचार्य विद्यासागर महाराज का पूजन करवाया।जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव सेअर्घ्य समर्पित किए। दोपहर में समय सार काशिक्षण व शाम को आचार्य भक्ति व प्रश्न मंच के बाद आरती का आयोजन हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
