बडो से काम मत करवाना बड़ों के सदा काम करना–मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज शाही पंचकल्याणक महोत्सव के मंडप में होगा पिच्छिका परिवर्तन
ललितपुर
–राग करें निस्वार्थ करें ,हम अपने से भी अपेक्षा ना रखें। मुझे भाई से कुछ नही चाहिये ।भाई चाहिये। बहुत अच्छे से मिलने वाले भाई बहिन भी घृणा से भरें रहते हैं। भाई ही भाई का दुश्मन बन जाता है। पत्नि को पति से कुछ नही चाहिये। ये आ जाये तो तलाक जो आजकल हो रहा है वो नही होगें। संबधों में स्वार्थ नही आना चाहिए हमे पेंड सें भी फुल फल नही चाहिए। हमे उसे हरा रखना चाहिये। ये चिंता करे, राग करे, निस्वार्थ करे,कोई इच्छा नही ऐसे राग को करुणा कहा है।
उक्त उद्गार मध्यप्रदेश की सीमा से लगे ललितपुर में पंचकल्याणक महोत्सव की पूर्व वेला में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने व्यक्त किए
जैन युवा वर्ग के संरक्षक विजय धुर्रा ने ललितपुर से लौटकर बताया कि मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज के चरणों में श्री दिगम्बर जैन युवा वर्ग की ओर से श्री फल भेंट कर आशीर्वाद लिया इस हेतु युवा वर्ग के अध्यक्ष सुलभ अखाई संरक्षक विजय धुर्रा विट्टू जैन पीयूष जैन सजीव जैन सुधीर जैन संदीप वैध सहित अन्य भक्तों ने श्री फल किए।
ऐतिहासिक होगा शाही पंचकल्याणक*

सीधे प्रसारण में मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि अशोक नगर के ऐतिहासिक गजरथ महोत्सव के बाद ललितपुर में एक साथ 11 रथों का चलना ऐतिहासिक होगा। इस महा महोत्सव में साढ़े पाच क्विंटल वजनी। शुद्ध चांदी से निर्मित रजत प्रतिमा की प्रतिष्ठा महा महोत्सव में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के कर कमलों से होने जा रही है। सभा का संचालन कर रहे आलोक शास्त्री ने कहा कि इस महा महोत्सव में एक और आकर्षक होगा जब मुनि पुंगव अपनी पिच्छिका को परिवर्तित करेंगे ।ये कार्यक्रम अशोक नगर के युवा वर्ग द्वारा विजय धुर्रा शैलेन्द्र श्रागर द्वारा अपनी टीम के साथ आपके समक्ष नये अंदाज में रखेंगे ।
जिसके पास जो वस्तु हो उसे वह आगे करें

मुनिश्री ने कहा कि हम उसको अपने से अधिक गुणवान,हमसे आगे है या तो हम आज आगे बडे या यह वस्तु मुझे मिलना चाहिये ये वस्तु में पा नही सकता तो जिसके पास यह वस्तु हो उसको आगे कर देना,मैं जों नही हो वो जिसके पास है उसको हमे आगें करके चलना हैं।
अच्छे आदमी से पाने की इच्छा मत करो, उनकी सुरक्षा करो ,उनसे संबंध बनाकर चलो। वो आपके काम नही आयेगें। बड़ों से हमारे संकट दुर मत कराना। हम उनसे नही कराये बल्कि उनकी सुरक्षा करे।

उन्होंने कहा कि कषाय करने वाला धर्मात्मा कहा बस एक शब्द जोड़ना मुझे उससे कुछ नही चाहिये वो चाहिये मुझे आप भी नही चाहिये आपका नाम चाहिये।
जो हमसे ज्यादा पुण्यात्मा हो, उसको पुण्यहीन आगे करे यदि पैसे में अमीर आदमी को आगे, अज्ञानी ज्ञानी को,शक्तिशाली को कमज़ोर,पापी धर्मात्मा को,कोई शक्ति हमसे अधिक है उसे हम अपने से अच्छा कह सके उसे आगे कर देना हम जो करते हैं करे लेकिन अपनी जिंदगी मे अच्छे आदमी के संगती कर सके।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
