पावागढ़ सिद्धक्षेत्र गुजरात में मिला परम सौभाग्यआर्यिका श्री विनम्र मति माताजी की पावन पिच्छिका प्राप्त कर धन्य हुआ बड़जात्या परिवार कामवन*
पावागढ़ (गुजरात)।
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र पावागढ़ में आयोजित कल्पद्रुम विधान समापन एवं नवीन पिच्छिका परिवर्तन समारोह के अवसर पर कामवन निवासी शिखरचंद संजय जैन बड़जात्या परिवार को पुण्यदायी सौभाग्य प्राप्त हुआ।
समारोह में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में प्रथम गणिनी समाधिस्थ आर्यिका रत्न श्री विजयमती माताजी की सुशिष्या आर्यिका श्री विनम्र मति माताजी की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का अवसर मिला।

आचार्य श्री के कर-कमलों से यह पावन पिच्छिका सुनीता जैन धर्मपत्नी शिखरचंद जैन, संजय जैन बड़जात्या, मनोज जैन, नीरज जैन, सुमतचंद जैन, संतोष देवी, संजना जैन एवं नैतिक जैन को प्रदान की गई। इस अवसर पर सम्पूर्ण परिवार का मन श्रद्धा, भक्ति एवं आत्मिक आनंद से सरोबार हो उठा।


जैन संतों की पिच्छिका का महत्व
दिगम्बर जैन परंपरा में पिच्छिका केवल एक धार्मिक उपकरण नहीं, बल्कि अहिंसा, संयम, करुणा और जीव-दया का प्रतीक मानी जाती है। मुनिराज एवं आर्यिकाएँ चलते समय अथवा बैठने से पूर्व सूक्ष्म जीवों की रक्षा हेतु पिच्छिका का उपयोग करते हैं। इसलिए किसी संत की पिच्छिका प्राप्त होना अत्यंत दुर्लभ आध्यात्मिक सौभाग्य एवं अनमोल आशीर्वाद माना जाता है।


इस पावन अवसर ने बड़जात्या परिवार के लिए जीवन भर की अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृति प्रदान की। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे गुरु कृपा एवं पूर्व संचित पुण्यों का प्रतिफल बताया।
“गुरु कृपा से प्राप्त पिच्छिका केवल स्मृति नहीं, बल्कि संयम, सेवा और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।”
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
