दिगम्बर जैन मुनियों का पटना सिटी से पावापुरी तीर्थ के लिए हुआ मंगल विहार
पटना सिटी:
आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री 108 वृषभानन्द जी मुनिराज ससंघ तथा युगलमुनि श्री 108 शिवानंद जी एवं प्रशमानंद जी मुनिराज 5 पिच्छी दिगम्बर जैन साधुओं का शुक्रवार को प्रातः 07 बजे पटना सिटी से नालंदा के जैन तीर्थ के लिए मंगल पदविहार हुआ।
इससे पूर्व झाऊगंज स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर व लंगूर गली स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन गुरारा मंदिर में प्रातः जिनेन्द्र भगवान का मंगल अभिषेक-शांतिधारा पूज्य गुरुदेव के पावन सानिध्य में हुआ।

मीडिया प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि जैन मुनियों का संघ दिल्ली से हजारों किलोमीटर की मंगल पदयात्रा कर अनेक तीर्थों की वंदना करते हुए महामुनि श्री सेठ सुदर्शन स्वामी की निर्वाण भूमि कमलदह सिद्ध क्षेत्र पहुंचे थे। इसके बाद भगवान महावीर की जन्म व निर्वाण भूमि नालंदा के कुंडलपुर, पावापुरी व राजगृह के बाद पंचतीर्थ करते हुए झारखण्ड स्थित सम्मेद शिखर जी पहुंचेगे।

*सहन नहीं कर पाये तो टूटते व बिखरते चले जायेंगे- जैन संत श्री वृषभानंद जी*
उपाध्याय श्री वृषभानंद जी महाराज ने कहा कि जहाँ सहनशीलता है वहीं स्वर्ग है। आज मानव की सहन शीलता घटती जा रही है यदि सहनशीलता बढ़ जाये तो आज भी आप और हम उसी चौथे काल को जहाँ पर रामराज्य होता था, उसे प्राप्त कर सकते हैं। सहन नहीं कर पाये तो टूटते व बिखरते चले जायेंगे। टूटता हुआ व्यक्ति अपनी शक्ति को नष्ट करता है और जुड़ता हुआ व्यक्ति अपनी शक्ति का संग्रह करता है। शक्ति का संग्रह ही शक्तिपुंज है। हमारी आत्मा शक्ति पुंज है वह सिद्ध बने, भगवान् बने इसका पहला सूत्र है सहनशील बनो, सहनशील हमारा स्वभाव है।


जैन साधुओं के पावन सान्निध्य पाकर धर्म, संयम, तप एवं सदाचार की प्रवाहित दिव्य धारा में पटना जैन समाज के भक्तों ने आत्मिक उन्नति का अनुपम लाभ प्राप्त किया।
: प्रवीण जैन (पटना) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
