निर्वाण एवं पावन भूमि की वंदना से पुण्य रूपी अक्षय निधि प्राप्त होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
चाकसू वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री108 वर्धमान सागर जी का अतिशय क्षेत्र अक्षय निधि आदिश्वर धाम चाकसू से मंगल विहार हुआ इसके पूर्व चाकसू के प्राचीन जैन मंदिर से आचार्य श्री108 प्रज्ञा सागर जी महाराज ने पुनः आदिश्वरधाम चाकसू में आकर आचार्य श्री वर्धमानसागर की आचार्य भक्ति कर चरण वंदना की। दोनों आचार्य संघ सानिध्य में श्री जी का पंचामृत अभिषेक हुआ राजेश पंचोलिया अनुसार इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संक्षिप्त आशीर्वचन में बताया कि सिद्ध, अतिशय क्षेत्र , तीर्थंकरों की पंचकल्याणक भूमि पावन होती हैं। इनसे क्षेत्र के नाम अनुरूप पुण्य रूपी अक्षय निधि प्राप्त होती हैं। आदिश्वर भगवान ने भोग भूमि के बाद असि मसि कृषि ,शिल्प ,कला और वाणिज्य का उपदेश जनता प्रजा को बेहतर जीवन यापन के लिए दिया।पुत्रियों के माध्यम से अंक और लिपि का ज्ञान दिया इसलिए पुण्य को अक्षय रखे ।प्रातः आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने संघ सहित आचार्य वर्धमान सागर जी को पदमपुरा बिहार के लिए मंगल विदाई दी आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने चरण वंदना कर परिक्रमा लगाकर संघ को विदाई दी प्रज्ञा सागर जी महाराज के चरण वंदना कर संघ के शेष साधुओं ने भक्ति की। ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या ,परमीत भद्रावती अनुसार।6 फरवरी को सुबह चाकसू से आचार्य श्री संघ का मंगल बिहार हुआ 3 .4 km शीतला माता मंदिर चाकसू में आहार हुआ।दोपहर को 6.3 किलोमीटर बिहार कर शिवदास पूरा सड़क टोल निकट रात्रि विश्राम हुआ।7 फरवरी को 3.3 किलो मीटर विहार कर आचार्य संघ की आहार चर्या महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज शिवदासपूरा में होगी। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 31 साधुओं सहित अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाडा में 8 फरवरी दोपहर को प्रवेश होगा पूर्व से विराजित आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी एवं क्षेत्र कमेटी , पंच कल्याणक समिति आचार्य संघ की भव्य आगवानी करेंगे।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
