ग्वालियर जिले के मोहना श्री चंद्राप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री विनयसागर महाराज ने कुंए से 900 सौ साल पुरानी नवग्रह पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा,निकली शोभायात्रा, गूंजे जयकारे।
ग्वालियर -:
ग्वालियर जिले के मोहना तहसील स्थित श्री दिगंबर चंद्राप्रभु जैन मंदिर में आज मंगलवार को श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज के सानिध्य में कई सालों पुराने जैन मंदिर के प्रांगण के अंदर बने कुंए में 900 सौ साल पुरानी नवग्रह पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा निकलने से व मोहना सकल जैन समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गयी। मूर्ति निकलने की खबर पाते ही आसपास के ग्राम के लोगों मूर्ति के दर्शन करने के लिए तांता लग गया। मुनिश्री का 12 मुनि दीक्षा दिवस भी बनाया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज को अलग अलग समय में तीन बार रक्षका रक्षिका देवी देवताओं ओर देवों के द्वारा सपनों में संकेत दे रहे थे। तभी मुनिश्री भिंड से मोहना पहुंचे। प्रतिमा निकले से पहले मुनिश्री के सानिध्य में कई जगहों से पहुंचे जैन समाज के लोगो ने णमोंकार महामंत्र बोलने लगे। 30 फुट नीचे कुएं में मोटर डालकर पानी निकालने के बाद व्यक्ति नीचे पहुंचा। व्यक्ति कुएं के नीचे खोजने पर प्रतिमा मिली। अंदर से आवाज दी की प्रतिमा मिली है तो कॉफी संख्या में मोजूद गुरुभक्त नृत्य करने के साथ भगवान ओर गुरुदेव के जयकारे से प्रांगण गूंज उठा।

प्रतिमा ऊपर आने पर मुनिश्री विनय सागर महाराज ने प्रतिमा को नतमस्तक होकर नमन प्र किया। कुएं से निकलने वाली प्रतिमा की खबर लगते ही ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, नरवर, घाटीगांव आदि जगहों से गुरुभक्त दर्शनों के लिए पहुंचते। वही मंदिर के विजय जैन, शिखर जैन, घनश्याम जैन, पंकज जैन, शीतल जैन, सुधीर जैन ने आदि मौजूद थे।

मुनिश्री सानिध्य में निकली प्राचीन प्रतिमा को गाजेबाजे के साथ कराया नगर भ्रमण*
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विनय सागर महाराज के सानिध्य में जैन समाज के लोगो ने नवग्रह पार्श्वनाथ भगवान की शोभायात्रा निकाली। गाजे बाजे के साथ जैन मंदिर से शुरू होकर नगर भ्रमण कर वापस जैन धर्मशाला पहुंची। जैन समाज के लोगो ने जगह जगह आरती उतारी। महिलाएं भजन ओर पुरुषों ने जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा वापस आने पर प्राचीन नवग्रह पार्श्वनाथ भगवान का प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन आगरा ओर पंडित शशिकांत शास्त्री ने मंत्रों के द्वारा अभिषेक कराया। एवम मुनिश्री विनय सागर महाराज के श्रीमुख से शांतिधारा सम्पन्न हुई।

पार्श्वनाथ भगवान संवत् 1354 प्राचीन प्रशस्ति मिली।
जीर्णोद्वारक श्रमण मुनिश्री विनय सागर जी महामुनिराज को मोहना जैन मंदिर में प्रतिमा का जो सपना देवों द्वारा दिया था। कुएं मिली प्राचीन नवग्रह पार्श्वनाथ भगवान संवत् 1354 प्रशस्ति लिखी है। यह प्रतिमा लगभग 900 सौ वर्ष पुरानी है। प्रतिमा पर नौ नाग के फन है। ये प्रतिमा पांच इंच की है। मूर्ति अष्टधातु की है। इस प्रतिमा पर रक्षक देवों देवियां भगवान के समवशरण विराजित हे। पहले भी इस मंदिर भूमि से भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा कई वर्षों पहले निकाली गई थी।


भगवान के प्रति समर्पण और धर्म की रक्षा से संबंधित है-: मुनिश्री विनय सागरजी।*
मुनिश्री विनय सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि कुएं या जमीन में दबी हुई प्रतिमा को बाहर निकालना और उसे सम्मानपूर्वक मंदिर में प्रतिष्ठित करना अत्यधिक पुण्य और भक्ति का कार्य है। यह भगवान के प्रति समर्पण और धर्म की रक्षा से संबंधित है, जो आत्मिक शुद्धि और कर्म क्षय में सहायक होता है। यह कृत्य भक्त के मन में भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा और उनके गुणों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
सचिन जैन ग्वालियर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
