शीतल तीर्थ कमेटी ने किया श्रुत संवेगी मुनि से निवेदन अब रतलाम में भी होगी मंत्राक्ष की गूंज
रतलाम/भीलवाड़ा, 23 जनवरी।
आचार्य योगीन्द्र सागर जी का जैन साहित्य पर अद्वितीय उपकार है कि आचार्य कुंदकुंद स्वामी द्वारा रचित पाहुड़ों में से झाण झयण पाहुड़ को आज भी सुरक्षित रखा जा सका है। जैन आगमों के संरक्षण हेतु उनके इस महान योगदान को स्मरण करते हुए, पूज्य श्री की स्मृति में शीतल तीर्थ पर एक ऐसे जिनवाणी मंदिर के निर्माण का संकल्प है, जहाँ आने वाले हजारों वर्षों तक जिनवाणी का संरक्षण किया जा सके। इस पुनीत कार्य के लिए मैं स्वयं शीतल तीर्थ अवश्य आऊँगा।
यह उद्गार भीलवाड़ा प्रवास के दौरान श्रुत संवेगी मुनि 108 श्री आदित्य सागर जी मुनिराज ने शीतल तीर्थ कमेटी को आशीर्वाद स्वरूप प्रदान किए।क्षेत्र अधिष्ठात्री ब्र. डॉ. सविता दीदी ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य समाधिस्थ आचार्य योगीन्द्र सागर जी महामुनिराज की प्रेरणा से रतलाम से 11 किलोमीटर दूर धामनोद में स्थित श्री दिगंबर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ का निर्माण किया गया। वर्ष 2024 में पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी मुनिराज सहित 72 श्रमण-श्रमणियों के सान्निध्य में इस क्षेत्र का ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न हुआ। तभी से यह भाव था कि श्रुत संवेगी मुनि 108 श्री आदित्य सागर जी का भी इस पावन क्षेत्र में आगमन हो।
ट्रस्ट अध्यक्ष महेन्द्र जैन (गुड़ वाला) ने बताया कि पिछले दो वर्षों से क्षेत्र कमेटी द्वारा निरंतर मुनि संघ से निवेदन किया जा रहा था। इसी क्रम में भीलवाड़ा प्रवास के दौरान डॉ. सविता दीदी के नेतृत्व में सौधर्म इंद्र महावीर गांधी, प्रभातदोषी, सरिता जैन, राकेश जैन सहित पूरी कमेटी ने पुनः निवेदन किया। इस बार हमारे निवेदन को स्वीकार करते हुए पूज्य मुनि श्री ने शीतल तीर्थ आगमन की स्वीकृति प्रदान की।

इस अवसर पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन भी योगी परिवार एवं शीतल तीर्थ कमेटी को प्राप्त हुआ। आगामी फरवरी माह में मुनि आदित्य सागर जी के सान्निध्य में बांसवाड़ा में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के पश्चात मुनि संघ का विहार शीतल तीर्थ की ओर होगा—ऐसे निर्देश पूज्य श्री द्वारा प्रदान किए गए।

मंत्राक्ष आयोजन के साथ जिनवाणी मंदिर का भी होगा निर्माण
प्रवक्ता राकेश जैन ‘चपलमन’ के अनुसार मुनि श्री द्वारा णमोकार मंत्र से उद्भूत मंत्राक्ष की ध्वनियों के माध्यम से विभिन्न रोगों के निवारण हेतु अद्भुत सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।


ऐसी मान्यता है कि इस आतिशय, शांत एवं पावन भूमि पर आयोजित मंत्राक्ष कार्यक्रम विशेष रूप से प्रभावकारी एवं फलदायी होंगे। कमेटी द्वारा मंत्राक्ष आयोजन हेतु भी पूज्य श्री से निवेदन किया जाएगा तथा मुनि श्री की कल्पना के अनुरूप जिनवाणी मंदिर के निर्माण का मार्गदर्शन प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। पूज्य श्री की अनुमति प्राप्त होते ही संपूर्ण आयोजन की तिथियाँ शीघ्र ही घोषित की जाएँगी।
सूचना स्रोत:
राकेश जैन ‘चपलमन’ – 9829097464 से प्राप्त
जानकारी संकलन – अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी – 9929747312

